Budget 2026 Explained: 1 फरवरी को बजट पेश करने का कारण क्या है? बही खाता और ब्लू शीट-जानिए, सब

Spread the love & Share it

Budget 2026 Explained

Budget 2026 Explained: हर साल देश की आर्थिक नीतियों और वित्तीय योजनाओं का रोडमैप तय करने वाला केंद्रीय बजट 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाता है। यह तारीख सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि व्यावहारिक और ऐतिहासिक कारणों से चुनी गई है। इस साल (2026) भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी को सुबह 11 बजे बजट पेश करेंगी, जो हाल के इतिहास में पहली बार रविवार को प्रस्तुत होने वाला बजट होगा।

बजट 1 फरवरी को पेश करने की मुख्य वजह

भारत का वित्तीय वर्ष (Financial Year) 1 अप्रैल से शुरू होता है और 31 मार्च को खत्म होता है। पहले बजट फरवरी के आखिरी कार्य दिवस को शाम 5 बजे पेश किया जाता था, जो ब्रिटिश काल की परंपरा थी। उस समय लंदन स्टॉक एक्सचेंज के समय के अनुसार शाम को पेश किया जाता था, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित न हों। लेकिन 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस तारीख को बदलकर 1 फरवरी कर दिया। इसका मुख्य उद्देश्य था कि बजट पेश होने के बाद संसद में चर्चा, पास होने और विभिन्न विभागों में फंड जारी करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। पहले फरवरी अंत में पेश होने पर मई-जून तक प्रक्रिया लंबी खिंच जाती थी, जिससे योजनाओं में देरी होती थी। अब 1 फरवरी से अप्रैल तक लगभग दो महीने का समय मिल जाता है, जिससे बजट प्रावधानों को समय पर लागू करना आसान हो जाता है।

बजट से जुड़ी प्रमुख परंपराएं और गोपनीय प्रक्रियाएं

  • ब्लू शीट: बजट की सबसे गोपनीय दस्तावेज ब्लू शीट है। यह नीले रंग की मास्टर शीट होती है, जिसमें सभी वित्तीय गणनाओं का सार लिखा होता है। इसकी सुरक्षा इतनी कड़ी है कि वित्त मंत्री भी इसे उत्तर ब्लॉक से बाहर नहीं ले जा सकतीं।
  • बही खाता: ब्रिटिश परंपरा के अनुसार लंबे समय तक बजट लाल ब्रीफकेस में लाया जाता था। लेकिन 2019 में निर्मला सीतारमण ने इसे पारंपरिक ‘बही खाता’ में पेश किया। कोरोना काल में पेपरलेस हो गया, लेकिन टैबलेट को बही खाते के कवर में लाने की परंपरा बनी रही।
  • हलवा समारोह: बजट प्रिंटिंग से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा समारोह होता है। अधिकारी और कर्मचारी मिलकर हलवा बनाते-खाते हैं, जो बजट प्रक्रिया के अंतिम चरण की शुरुआत का प्रतीक है। इसके बाद सभी अधिकारी मंत्रालय परिसर में ही रहते हैं, ताकि कोई सूचना लीक न हो।

समय में हुए बदलाव

  • पहले शाम 5 बजे पेश होता था (लंदन समय के अनुसार)।
  • 1999 में यशवंत सिन्हा ने इसे सुबह 11 बजे शिफ्ट किया।
  • 2017 से 1 फरवरी को पेश करने की व्यवस्था शुरू हुई।

यह बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं, जनता की अपेक्षाओं और अर्थव्यवस्था की मजबूती का आईना होता है। इस बार निर्मला सीतारमण का यह नौवां बजट होगा, जिसमें मिडिल क्लास, टैक्स राहत, इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास पर फोकस की उम्मीद है।

ALSO READ – चंदौली में आर्थिक तंगी ने ली अधेड़ की जान, खेत में पेड़ से लटका मिला शव


Spread the love & Share it

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *