
Opposition MPs suspended: संसद की कार्यवाही के दौरान मंगलवार को लोकसभा में भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बार-बार टोके जाने से नाराज विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए लोकसभा स्पीकर की ओर कागज उछाल दिए। इसके बाद स्पीकर ने सख्त कदम उठाते हुए 8 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया।
निलंबित किए गए सांसदों में कांग्रेस के मणिकम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, हिबी ईडन, किरन रेड्डी, प्रशांत पडोले, एस. वेंकटेशन और डीन कोरियाकोस शामिल हैं। कार्रवाई के बाद सभी निलंबित सांसद संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं।
विपक्ष ने बताया गलत कार्रवाई
निलंबन पर प्रतिक्रिया देते हुए अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि यह पूरी तरह गलत फैसला है। उन्होंने कहा, “हम संघर्ष करेंगे और जनता की आवाज उठाते रहेंगे।”
वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने आरोप लगाया कि दो दिनों से राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया, “अगर यही लोकतंत्र है तो फिर विपक्ष अपनी बात कैसे रखे?” वड़िंग ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने आज अपने लेटर पैड पर साइन कर दिया था, फिर भी सरकार को आपत्ति क्यों है।
इससे पहले भाजपा ने संसद में हंगामा और स्पीकर की ओर कागज फेंकने की घटना को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी और दोषी सांसदों पर कार्रवाई की मांग की थी।
जानिए निलंबित सांसदों के बारे में
मणिकम टैगोर: तमिलनाडु से कांग्रेस सांसद, लोकसभा में पार्टी के व्हिप और आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं।
गुरजीत सिंह औजला: अमृतसर से लगातार जीत दर्ज कर रहे सांसद, नशामुक्ति और किसानों के मुद्दों पर मुखर।
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग: लुधियाना से सांसद और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष, तेज-तर्रार राजनीति के लिए पहचान।
हिबी ईडन: केरल के एर्नाकुलम से सांसद, एनएसयूआई के पूर्व अध्यक्ष और युवा मुद्दों पर सक्रिय।
किरन कुमार रेड्डी: तेलंगाना के भुवनगिरी से सांसद, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के करीबी माने जाते हैं।
प्रशांत पडोले: विदर्भ क्षेत्र से सांसद, किसानों और ओबीसी मुद्दों को उठाने के लिए जाने जाते हैं।
एस. वेंकटेशन: सीपीआई (एम) सांसद, प्रसिद्ध तमिल लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता।
डीन कोरियाकोस: इडुक्की से सांसद, युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और किसानों के मुद्दों पर मुखर।
लोकसभा में हुई इस घटना ने एक बार फिर संसद के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव को उजागर कर दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे इस सियासी गतिरोध का क्या समाधान निकलता है।
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