
Varanasi News: ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गुरुवार को वाराणसी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री भाजपा को हो रहे राजनीतिक नुकसान को रोकने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन “मठाधीश महाराज हठ पर अड़े हुए हैं।”
‘कालनेमि’ टिप्पणी पर मांगा स्पष्टीकरण
शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री द्वारा हाल में इस्तेमाल किए गए ‘कालनेमि’ शब्द को लेकर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि यह टिप्पणी किसके लिए की गई थी। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि असली सनातनी कौन है और कौन वेशधारी या ढोंगी आचरण वाला व्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के संकेतात्मक शब्दों से भ्रम पैदा होता है और इसे स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
संत समाज को 10 दिन का अल्टीमेटम
शंकराचार्य ने संत समाज को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि वे शास्त्र और सनातन परंपरा के साथ खड़े हैं या किसी राजनीतिक व्यक्ति के साथ। उन्होंने कहा कि यदि कोई संत मुख्यमंत्री के समर्थन में खड़ा होता है, तो उसके प्रति भी संत समाज उसी अनुसार व्यवहार करेगा।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या गेरुआ वस्त्र धारण करने वाला व्यक्ति मांसाहार कर सकता है और क्या कोई विरक्त संत वेतनभोगी हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि 10 दिन में संत समाज ने जवाब नहीं दिया तो इसे मुख्यमंत्री के समर्थन के रूप में माना जाएगा।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव मौर्य पर भी टिप्पणी
शंकराचार्य ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा 101 बटुकों के पूजन कार्यक्रम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि यह धार्मिक आस्था का विषय था, तो उस बटुक को भी बुलाया जाना चाहिए था जिसके साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार हुआ था।
वहीं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि उनके बयान से यह प्रतीत होता है कि उनके पास कार्रवाई करने की वास्तविक शक्ति नहीं है।
11 मार्च को लखनऊ में होगी संतों की बड़ी बैठक
शंकराचार्य ने घोषणा की कि 11 मार्च को लखनऊ में संत, महंत और विद्वानों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें संत समाज अपनी आधिकारिक राय सार्वजनिक करेगा। उन्होंने गो-रक्षा के मुद्दे पर भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल घोषणाओं और प्रतीकात्मक कदमों से समस्या का समाधान संभव नहीं है।
मौनी अमावस्या विवाद का भी किया जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य ने प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दौरान हुई घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दिन उन्हें संगम स्नान के लिए जाने से रोका गया, जिससे संत समाज की भावनाएं आहत हुईं। उन्होंने कहा कि उस मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
उन्होंने दोहराया कि संत समाज को अब स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से अपना रुख तय करना होगा और शास्त्रसम्मत परंपराओं का पालन सुनिश्चित करना होगा।
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