
Bihar Rajya Sabha Elections 2026: बिहार में आगामी 16 मार्च 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य की पांच सीटों पर होने वाले इस चुनाव को लेकर सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष दोनों के सामने बड़ी राजनीतिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। यह चुनाव न सिर्फ राज्यसभा की सीटों का फैसला करेगा, बल्कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले बिहार की राजनीतिक दिशा भी तय करेगा।
JDU के सामने दिग्गजों को रिप्लेस करने की चुनौती
सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड के सामने है। पार्टी के वरिष्ठ नेता रामनाथ ठाकुर और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। पार्टी में लंबे समय से एक परंपरा रही है कि किसी भी नेता को तीसरी बार राज्यसभा नहीं भेजा जाता। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार इस परंपरा को कायम रखेंगे या अपने अनुभवी नेताओं पर फिर भरोसा जताएंगे।
BJP की नजर दो सीटों पर, नए चेहरों पर दांव संभव
वहीं भारतीय जनता पार्टी इस बार राज्यसभा में अपनी मजबूत वापसी की तैयारी में है। बिहार विधानसभा में 89 विधायकों के दम पर पार्टी दो सीटों पर दावा ठोक रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा भोजपुरी स्टार पवन सिंह या वरिष्ठ नेता नितिन नवीन जैसे चेहरों को मैदान में उतार सकती है। हालांकि पार्टी के सामने चुनौती यह है कि वह पुराने कार्यकर्ताओं और नए लोकप्रिय चेहरों के बीच संतुलन कैसे बनाए।
RJD के लिए अस्तित्व की लड़ाई, ‘जीरो’ होने का खतरा
बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्रधारी सिंह का कार्यकाल खत्म हो रहा है। मौजूदा विधानसभा गणित के अनुसार, एक सीट जीतने के लिए करीब 41–42 वोटों की जरूरत है, जबकि पार्टी के पास सिर्फ 25 विधायक हैं। ऐसे में अगर कांग्रेस और वाम दलों का पूरा समर्थन नहीं मिला तो पहली बार राज्यसभा में RJD का प्रतिनिधित्व खत्म हो सकता है। यह नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और पार्टी के लिए बड़ा झटका होगा।
NDA में सहयोगियों की बढ़ी उम्मीदें
इस चुनाव में NDA के सहयोगी दल भी अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। चिराग पासवान अपनी मां रीना पासवान के लिए राज्यसभा सीट की मांग कर रहे हैं, जबकि उपेंद्र कुशवाहा भी राज्यसभा जाने की कोशिश में हैं। ऐसे में भाजपा के लिए सहयोगियों को संतुष्ट रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
2029 से पहले सियासी सेमीफाइनल
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बिहार का यह राज्यसभा चुनाव महज सीटों का चुनाव नहीं है, बल्कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल है। इस चुनाव के नतीजे राज्य की राजनीतिक ताकत और भविष्य की रणनीति को तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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