
UP New Vidhan Sabha Building: उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा प्रतीक माने जाने वाला हजरतगंज स्थित ऐतिहासिक विधानसभा भवन अब धीरे-धीरे इतिहास का हिस्सा बनने जा रहा है। करीब 98 साल पुरानी यह इमारत अपनी भव्य पहचान के साथ मौजूद तो रहेगी, लेकिन आने वाले समय में यहां विधानसभा की कार्यवाही नहीं होगी। योगी सरकार अब राजधानी लखनऊ में एक नए और अत्याधुनिक विधानसभा परिसर के निर्माण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा चुकी है।
सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत गोमतीनगर स्थित सहारा शहर की विशाल जमीन पर नया विधानसभा कॉम्प्लेक्स तैयार किया जाएगा। इसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने डिजाइनिंग और प्लानिंग प्रक्रिया शुरू करते हुए कंसल्टेंट और आर्किटेक्ट चयन के लिए टेंडर जारी कर दिया है। इसके साथ ही यूपी की नई सत्ता नगरी का खाका लगभग तय माना जा रहा है।

सहारा शहर की जमीन पर बनेगा नया सत्ता केंद्र
जानकारी के मुताबिक नया विधानसभा परिसर गोमतीनगर के विपुल खंड स्थित सहारा शहर की 245 एकड़ जमीन पर विकसित किया जाएगा। इसमें करीब 170 एकड़ जमीन नगर निगम और 75 एकड़ जमीन एलडीए के हिस्से की बताई जा रही है।
यह वही जमीन है जिसे वर्ष 1994 में सहारा इंडिया परिवार को डेवलपमेंट के उद्देश्य से लीज पर दिया गया था। हालांकि बाद में शर्तों के उल्लंघन और कथित दुरुपयोग के आरोपों के चलते 9 अक्टूबर 2025 को नगर निगम ने इसकी लीज रद्द कर दी थी। अब यह जमीन फिर से सरकारी नियंत्रण में आ चुकी है और इसी पर यूपी का नया प्रशासनिक एवं राजनीतिक केंद्र विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है।
डिजाइन और प्लानिंग के लिए जारी हुआ टेंडर
एलडीए की ओर से जारी आरएफपी के अनुसार इच्छुक कंपनियां 23 मई से 21 जून तक आवेदन कर सकेंगी। कंसल्टेंट के चयन के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। इसी के आधार पर भवन की डिजाइन, निर्माण अवधि और कुल लागत तय होगी।
सूत्रों का कहना है कि परियोजना पर 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आने का अनुमान है। निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा और पूरा प्रोजेक्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा।
सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर बनेगा नया परिसर
सरकारी सूत्रों के अनुसार नया विधानसभा भवन परिसर दिल्ली के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसे केवल विधानसभा भवन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे एक पूर्ण प्रशासनिक और राजनीतिक कॉम्प्लेक्स के रूप में तैयार किया जाएगा।
इस मेगा प्रोजेक्ट में विधानसभा भवन, विधान परिषद भवन, मुख्यमंत्री कार्यालय, मंत्रियों के चैंबर, विधायकों के कार्यालय, सचिवालय से जुड़े दफ्तर और मुख्यमंत्री आवास भी शामिल होंगे। यानी भविष्य में उत्तर प्रदेश की सत्ता का बड़ा हिस्सा इसी नए परिसर से संचालित हो सकता है।
98 साल पुराना है मौजूदा विधानसभा भवन
हजरतगंज स्थित वर्तमान विधानसभा भवन का उद्घाटन 21 फरवरी 1928 को हुआ था। यह इमारत ब्रिटिश काल से लेकर आज तक उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र रही है। आजादी से पहले की राजनीति, कांग्रेस का दौर, गठबंधन सरकारें और बदलते राजनीतिक समीकरण—इस भवन ने सब देखा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नया भवन बनने में कम से कम दो वर्ष का समय लग सकता है। ऐसे में वर्तमान विधानसभा भवन अपने 100 वर्ष पूरे करने के बाद ही औपचारिक रूप से ‘रिटायर’ होगा।
क्यों महसूस हुई नए विधानसभा भवन की जरूरत?
प्रदेश में वर्तमान समय में विधानसभा की 403 सीटें हैं। लेकिन भविष्य में महिला आरक्षण लागू होने और परिसीमन के बाद सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में मौजूदा विधानसभा भवन क्षमता और सुविधाओं के लिहाज से छोटा पड़ सकता है।
सरकार का मानना है कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अधिक क्षमता और आधुनिक तकनीक से लैस नया विधानसभा परिसर समय की मांग बन चुका है।
तकनीकी सहयोग के लिए हुआ समझौता
इस परियोजना को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए एलडीए ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के साथ भी समझौता किया है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अब माना जा रहा है कि आने वाले समय में लखनऊ केवल उत्तर प्रदेश की राजधानी ही नहीं, बल्कि देश के सबसे आधुनिक राजनीतिक प्रशासनिक केंद्रों में भी शामिल हो सकता है।