
UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों को लेकर योगी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। प्रदेश के सभी ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 मई को समाप्त हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद पंचायतों की जिम्मेदारी अब भी उन्हीं के हाथों में रहने वाली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौजूदा ग्राम प्रधानों को पंचायतों का प्रशासक बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
सरकार के इस फैसले के बाद अब प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक कामकाज बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। माना जा रहा है कि इस संबंध में सोमवार शाम तक आधिकारिक आदेश भी जारी किया जा सकता है।

पहली बार ग्राम पंचायतों में बनेगी प्रशासक समिति
उत्तर प्रदेश में पहली बार ग्राम पंचायतों के संचालन के लिए प्रशासक समिति बनाए जाने की तैयारी की जा रही है। पंचायती राज विभाग ने पंचायत चुनाव में संभावित देरी को देखते हुए यह फैसला लिया है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश में पंचायत चुनाव अब 2027 विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की संभावना है। ऐसे में पंचायतों के नियमित कार्य और विकास योजनाएं प्रभावित न हों, इसके लिए मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासकीय जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
57 हजार से ज्यादा पंचायतों में लागू होगा फैसला
प्रदेश की कुल 57,695 ग्राम पंचायतों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। 26 मई से ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा था, जिसके बाद पंचायतों में प्रशासनिक शून्यता पैदा होने की आशंका थी।
सरकार ने इस स्थिति से बचने के लिए मौजूदा प्रधानों को ही पंचायत संचालन की जिम्मेदारी देने का फैसला लिया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की निगरानी जारी रह सकेगी।
पंचायत चुनाव को लेकर अटकलों पर लगा विराम
पिछले कुछ समय से पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर लगातार चर्चा चल रही थी। माना जा रहा था कि पंचायत चुनाव जल्द कराए जा सकते हैं, लेकिन सरकार के इस फैसले ने लगभग साफ कर दिया है कि अब पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे।
इस निर्णय के बाद पंचायत चुनाव की तैयारियों और संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है।
विकास कार्यों की निगरानी करते रहेंगे ग्राम प्रधान
पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रशासक बनाए जाने के बाद ग्राम प्रधान पंचायतों के नियमित प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ विकास योजनाओं की निगरानी भी करते रहेंगे।
सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक बाधा न आए और योजनाओं का लाभ लोगों तक लगातार पहुंचता रहे।
ग्रामीण राजनीति में बढ़ेगी हलचल
योगी सरकार के इस फैसले के बाद ग्रामीण राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। पंचायत चुनाव टलने से मौजूदा प्रधानों को लंबे समय तक पंचायतों में प्रभाव बनाए रखने का मौका मिलेगा।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने का फैसला प्रदेश की ग्रामीण राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।