TMC में बड़ा विवाद! बागी गुट का दावा- ममता बनर्जी हटाई गईं, अभिषेक बनर्जी सस्पेंड

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West Bengal Politics

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को उस समय हलचल मच गई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक बागी गुट ने दावा किया कि पार्टी की विशेष बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटा दिया गया है। इसी बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी को महासचिव पद से निलंबित करने का भी फैसला लिए जाने का दावा किया गया।

बताया जा रहा है कि कोलकाता के न्यूटाउन क्षेत्र में आयोजित इस विशेष बैठक में बागी नेताओं, कुछ विधायकों, पूर्व पार्षदों और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने किया। बैठक के बाद जारी बयान में बागी नेताओं ने नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन की घोषणा भी की।

बागी गुट के अनुसार, हावड़ा सेंट्रल से विधायक अरूप रॉय को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। इसके अलावा संगठन में कई नए पदाधिकारियों की नियुक्ति किए जाने का भी दावा किया गया। नेताओं का कहना है कि यह निर्णय पार्टी संविधान के तहत लिया गया है और इसकी जानकारी निर्वाचन आयोग को भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

बैठक में शामिल नेताओं ने यह भी दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के कई विधायक और बड़ी संख्या में स्थानीय स्तर के नेता उनके समर्थन में हैं। उनका आरोप है कि पार्टी लंबे समय से संगठनात्मक संकट और नेतृत्व संबंधी असंतोष से जूझ रही थी, जिसके चलते विशेष बैठक बुलाकर नए नेतृत्व के चयन का फैसला लिया गया।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर ममता बनर्जी या उनके आधिकारिक खेमे की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी के आधिकारिक संगठन की ओर से भी अभी तक इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि बागी गुट अपने दावों को संगठनात्मक और कानूनी स्तर पर आगे बढ़ाता है, तो तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। फिलहाल पार्टी के भीतर अलग-अलग समूहों के सक्रिय होने की चर्चा तेज हो गई है, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलों का दौर जारी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक मामला आगे चलकर निर्वाचन आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं तक भी पहुंच सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि बागी गुट के दावों को पार्टी के भीतर कितना समर्थन प्राप्त है और तृणमूल कांग्रेस इस चुनौती से किस तरह निपटती है।

फिलहाल, पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है और सभी की निगाहें ममता बनर्जी खेमे की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।


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