
Pulitzer Prize 2026: वैश्विक पत्रकारिता के सबसे प्रतिष्ठित मंच पुलित्जर प्राइज 2026 में इस बार भारत का परचम लहराया है। भारतीय पत्रकार आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा को उनकी प्रभावशाली खोजी रिपोर्टिंग के लिए सम्मानित किया गया है। दोनों ने डिजिटल सर्विलांस और साइबर फ्रॉड जैसे गंभीर और जटिल मुद्दों को उजागर कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।

इस श्रेणी में मिला सम्मान
आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा को “Illustrated Reporting and Commentary” कैटेगरी में यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया। इस प्रोजेक्ट में उनके साथ ब्लूमबर्ग से जुड़ी नैटली ओबिको पियर्सन भी शामिल रहीं, जिन्होंने इस खोजी कार्य को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया।
‘trAPped’ रिपोर्ट ने दिलाई पहचान
जिस प्रोजेक्ट के लिए यह सम्मान मिला, उसका नाम ‘trAPped’ है। यह रिपोर्ट डिजिटल ठगी और निगरानी के बढ़ते खतरों पर केंद्रित है।
इसमें एक न्यूरोलॉजिस्ट की कहानी के माध्यम से दिखाया गया कि किस तरह “डिजिटल अरेस्ट” के जरिए लोगों को मानसिक और आर्थिक जाल में फंसाया जाता है।
रिपोर्ट की खासियत इसका प्रस्तुतीकरण है, जिसमें विजुअल्स और लेखन का अनोखा संयोजन इसे और प्रभावशाली बनाता है।
वैश्विक साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा
इस खोजी रिपोर्ट में यह उजागर किया गया है कि किस तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले संगठित गिरोह लोगों को झांसे में लेकर या जबरन “स्कैम सेंटर” में काम करने के लिए मजबूर करते हैं।
इस नेटवर्क के जरिए अरबों डॉलर की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया जाता है, जिसमें कई देशों के नागरिक प्रभावित होते हैं।
अनिरुद्ध घोषाल को भी मिला सम्मान
भारतीय मूल के पत्रकार अनिरुद्ध घोषाल को इंटरनेशनल रिपोर्टिंग कैटेगरी में सम्मानित किया गया।
वह एसोसिएटेड प्रेस की उस टीम का हिस्सा रहे, जिसने वैश्विक स्तर पर बढ़ते सर्विलांस सिस्टम पर गहन रिपोर्टिंग की।
इस रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल आम नागरिकों और प्रवासियों की निगरानी के लिए किया जा रहा है, जो एक गंभीर वैश्विक चिंता बन चुकी है।
क्यों खास है यह उपलब्धि?
पुलित्जर प्राइज को पत्रकारिता का सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है। ऐसे में भारतीय पत्रकारों का इस मंच पर सम्मानित होना न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे भारतीय मीडिया जगत के लिए गर्व का क्षण है।