
Make in India Defence: भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है और अब देश केवल अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में एक मजबूत निर्यातक के रूप में भी उभर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि सरकार की नीतियों और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी के चलते रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात दोनों में लगातार रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का प्रभाव रक्षा क्षेत्र में साफ दिखाई दे रहा है। घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने और विदेशी निर्भरता कम करने के लिए उठाए गए कदमों का सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है।
रक्षा उत्पादन पहुंचा रिकॉर्ड स्तर पर
रक्षा मंत्री के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ निजी कंपनियां भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। देश में रक्षा उपकरणों, हथियार प्रणालियों और सैन्य तकनीकों के निर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जिससे उत्पादन क्षमता में विस्तार हुआ है।
विदेशी खरीद पर निर्भरता लगातार घट रही
सरकार द्वारा रक्षा खरीद में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दिए जाने का असर अब दिखाई देने लगा है। रक्षा मंत्रालय ने कई रक्षा उपकरणों की खरीद को घरेलू उद्योगों के लिए आरक्षित किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा खरीद में स्वदेशी उत्पादों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है और वर्तमान में कुल खरीद का बड़ा हिस्सा भारतीय कंपनियों से किया जा रहा है। इससे न केवल देश में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि विदेशी मुद्रा की बचत भी हुई है।
रक्षा निर्यात में भी नया मुकाम
भारत अब केवल रक्षा आयातक देश नहीं रह गया है। रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी देश ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों और सैन्य प्रणालियों का निर्यात कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में रक्षा निर्यात में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे भारत वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहा है।
वैश्विक बाजार में बढ़ रही भारतीय हथियारों की मांग
रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रक्षा उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी लागत के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी मांग बढ़ रही है।
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आकाश वायु रक्षा प्रणाली, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, विभिन्न प्रकार के रडार सिस्टम और स्वदेशी ड्रोन जैसी प्रणालियां भारत की रक्षा क्षमता का प्रतीक बन चुकी हैं। कई देशों ने इन प्रणालियों में रुचि दिखाई है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी बनी गेम चेंजर
रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी को इस बदलाव का अहम कारण माना जा रहा है। सरकार द्वारा लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाने, निवेश को प्रोत्साहन देने और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने से निजी उद्योगों को नई संभावनाएं मिली हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है, ताकि देश न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सके बल्कि दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातकों में भी शामिल हो सके।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम
विशेषज्ञों के अनुसार रक्षा उत्पादन और निर्यात में हो रही वृद्धि भारत की रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ विदेशी मुद्रा अर्जन, रोजगार सृजन और तकनीकी विकास को भी गति मिलेगी।
रक्षा क्षेत्र में तेजी से हो रही प्रगति यह संकेत देती है कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक रक्षा उद्योग में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने के लिए तैयार है।