
Varanasi News: उत्तर प्रदेश सरकार के स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क तथा पंजीयन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल के एक बयान को लेकर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने मंत्री की टिप्पणी को अमर्यादित और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए वाराणसी के पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने, सार्वजनिक माफी मंगवाने और उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त किए जाने की मांग की है।
‘ससुरा’ टिप्पणी को लेकर सपा ने जताई आपत्ति
समाजवादी पार्टी की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि चंदौली दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में राज्य मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए “ससुरा” जैसे आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया। सपा का कहना है कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की ओर से इस तरह की भाषा का प्रयोग राजनीतिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि इस तरह की बयानबाजी से राजनीतिक माहौल दूषित हो रहा है और समर्थकों की भावनाएं आहत हो रही हैं।
सपा ने कार्रवाई और बर्खास्तगी की मांग की
ज्ञापन में समाजवादी पार्टी ने मांग की है कि राज्य मंत्री रविन्द्र जायसवाल सार्वजनिक रूप से अपने बयान के लिए माफी मांगें। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो उन्हें मंत्री पद से हटाया जाए।
सपा का यह भी कहना है कि भाजपा नेताओं द्वारा लगातार विपक्षी नेताओं के खिलाफ विवादित बयान दिए जा रहे हैं, जिससे समाज में तनाव का माहौल बन सकता है। पार्टी ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
क्या कहा था रविन्द्र जायसवाल ने?
इससे पहले चंदौली दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में रविन्द्र जायसवाल ने समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी केवल एक विशेष वर्ग की राजनीति करती है।
मंत्री ने कहा था कि जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब सरकार ने कब्रिस्तानों की बाउंड्री कराने की योजना बनाई थी। उनके अनुसार, उस समय उन्होंने यह सुझाव दिया था कि यदि कब्रिस्तानों की सुरक्षा के लिए बजट दिया जा रहा है तो श्मशान घाटों के विकास और संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए, लेकिन तत्कालीन सरकार ने ऐसा नहीं किया।
राम मंदिर और तुष्टिकरण की राजनीति का भी किया जिक्र
रविन्द्र जायसवाल ने अपने बयान में राम मंदिर के मुद्दे का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े विषयों को बार-बार राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया जा रहा है। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष विशेष वर्ग के वोट बैंक को ध्यान में रखकर बयानबाजी कर रहा है।