
MuleHunter: देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर फ्रॉड ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग के विस्तार के साथ साइबर ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसी खतरे से निपटने के लिए अब भारतीय रिज़र्व बैंक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ‘MuleHunter.ai’ टूल को विकसित किया है, जिसे साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी तकनीकी पहल माना जा रहा है।
दरअसल, ‘MuleHunter.ai’ एक एडवांस एआई सॉफ्टवेयर है, जिसे RBI की सहयोगी संस्था Reserve Bank Innovation Hub ने दिसंबर 2024 में लॉन्च किया था। इस टूल का मुख्य उद्देश्य म्यूल अकाउंट की पहचान करना है। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका उपयोग साइबर अपराधी मनी लॉन्ड्रिंग और ऑनलाइन ठगी के लिए करते हैं। कई बार अपराधी फर्जी दस्तावेजों के जरिए खाते खुलवाते हैं या लोगों को लालच देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं।
सरकार अब इस टूल का व्यापक स्तर पर उपयोग चाहती है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने सभी बैंकों से MuleHunter.ai को अपनाने की अपील की है। शुरुआती चरण में जिन बैंकों में इस टूल को लागू किया गया, वहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि यह एआई सिस्टम हर महीने हजारों संदिग्ध खातों की पहचान करने में सक्षम रहा है।
यह एआई टूल बैंक खातों के ट्रांजेक्शन पैटर्न, व्यवहार और गतिविधियों का गहन विश्लेषण करता है। यदि किसी खाते में असामान्य लेन-देन, अचानक बड़ी रकम का ट्रांसफर या संदिग्ध गतिविधि पाई जाती है, तो सिस्टम तुरंत उसे फ्लैग कर देता है। इसके बाद बैंक संबंधित खाते को फ्रीज कर सकते हैं और आगे होने वाली ठगी को रोक सकते हैं।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के इस दौर में साइबर सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि MuleHunter.ai जैसे एआई टूल का व्यापक उपयोग बैंकिंग सिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाएगा और ग्राहकों का भरोसा मजबूत करेगा। यदि इसे देशभर में प्रभावी तरीके से लागू किया गया, तो यह साइबर ठगी के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।
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