
India AI Impact Summit: नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit के दौरान व्हाइट हाउस में AI नीति सलाहकार के रूप में कार्यरत Sriram Krishnan के बयान ने नई बहस छेड़ दी। उन्होंने कहा कि भारतीयों और भारतीय कंपनियों को “अमेरिकन AI स्टैक और इंफ्रास्ट्रक्चर” का उपयोग करना चाहिए। उनके इस बयान को कई लोगों ने भारत को केवल AI उपभोक्ता के रूप में स्थापित करने की कोशिश बताया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। आलोचकों का कहना है कि यह सोच दुनिया को दो हिस्सों में बांटती है—एक वे जो AI बनाते हैं और दूसरे वे जो केवल उसका इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, यह विचार केवल श्रीराम कृष्णन तक सीमित नहीं है।
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री Rishi Sunak, जो फिलहाल गोल्डमैन सैक्स के साथ जुड़े हैं, ने भी कहा कि AI अपनाने में भारत अग्रणी भूमिका निभा सकता है। Sam Altman ने भारत को AI के लिए “दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक” बताया। इसी तरह Sundar Pichai और Dario Amodei भी भारत को AI इकोसिस्टम के बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में देख रहे हैं।
साझेदारियां तेज, लेकिन सवाल बरकरार
OpenAI ने भारत में MakeMyTrip, JioHotstar और Tata Consultancy Services (TCS) के साथ साझेदारी की है। वहीं Anthropic ने Infosys, CRED और Razorpay के साथ हाथ मिलाया है। Google भी सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है।
इन घटनाक्रमों से यह तस्वीर उभरती है कि भारत में AI रोलआउट कहीं न कहीं 1990 के दशक के IT क्रांति जैसा ही नजर आ रहा है—जहां भारतीय कंपनियां सेवा प्रदाता बनीं, लेकिन मूल टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर पश्चिमी कंपनियों के हाथ में रहा।
क्या दोहराई जाएगी IT सेक्टर की कहानी?
भारत का IT सेक्टर—जैसे Infosys, Tata Consultancy Services और Wipro—वैश्विक स्तर पर मजबूत है, लेकिन ये कंपनियां मुख्यतः सेवा आधारित मॉडल पर काम करती हैं। क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर या ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे कोर टेक्नोलॉजी क्षेत्र में भारत अभी भी पीछे है।
इस बार भारत के इरादे अलग?
हालांकि 2026 का भारत 1990 के दशक के भारत से काफी अलग है। सरकार की India AI Mission के तहत 4,500 करोड़ रुपये के निवेश और 38,000 GPUs के क्लस्टर जैसी योजनाएं स्वदेशी AI इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की दिशा में कदम हैं। स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को कम दरों पर कंप्यूटिंग पावर उपलब्ध कराने की योजना भी इसी का हिस्सा है।
इसी कड़ी में Sarvam AI ने अपने LLM मॉडल Sarvam-30B और Sarvam-105B लॉन्च किए हैं। भले ही ये मॉडल GPT या Gemini जितने बड़े नहीं हैं, लेकिन ये भारतीय AI आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्वदेशी कंपनियां सफल रहीं, तो भारत केवल AI उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि निर्माता और उपभोक्ता दोनों की भूमिका निभा सकेगा। इससे अमेरिकी कंपनियों के साथ संबंध अधिक संतुलित और सहयोगात्मक हो सकते हैं।
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