Operation Sindoor Anniversary: जब भारत ने पाकिस्तान में घुसकर तोड़े आतंक के अड्डे, 3 दिन में झुकी पाक सेना

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Operation Sindoor Anniversary

Operation Sindoor Anniversary: 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में 26 भारतीय पर्यटकों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को और अधिक आक्रामक बनाते हुए पाकिस्तान में बैठे आतंकी नेटवर्क पर सीधा प्रहार करने का फैसला लिया।

इसी के तहत भारतीय सेना ने 6-7 मई 2025 की रात “ऑपरेशन सिंदूर” लॉन्च किया। यह पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की अब तक की सबसे बड़ी और सबसे सटीक सैन्य कार्रवाई मानी गई। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के संयुक्त अभियान ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया।

इस ऑपरेशन ने न केवल आतंक के अड्डों को तबाह किया, बल्कि पाकिस्तान की सैन्य क्षमता और उसके गुरूर को भी गहरा झटका दिया। हालात ऐसे बने कि महज तीन दिनों के भीतर पाकिस्तान को सीजफायर की गुहार लगानी पड़ी।

पहलगाम हमले का बदला: आतंक के गढ़ों पर सीधा हमला

भारत ने पहलगाम हमले के बाद शुरुआत में केवल आतंकी संगठनों को निशाना बनाया था। भारतीय रणनीति साफ थी कि जवाब आतंकवाद को दिया जाएगा, न कि आम नागरिकों को।

6 मई की आधी रात करीब 1:05 बजे भारतीय वायुसेना और थलसेना ने संयुक्त रूप से पाकिस्तान और PoK में स्थित 9 बड़े आतंकी ठिकानों पर मिसाइल और एयर स्ट्राइक की। इन हमलों का मुख्य निशाना जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैय्यबा, हिजबुल-मुजाहिद्दीन और अलकायदा से जुड़े कैंप थे।

भारतीय सेना ने बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय, मुरीदके में लश्कर-ए-तैय्यबा के बेस, मुजफ्फराबाद, कोटली और भिंबर जैसे इलाकों में सक्रिय आतंकी ढांचों को सटीक निशाना बनाया।

इन हमलों में ब्रह्मोस मिसाइल, स्कैल्प क्रूज मिसाइल और अन्य प्रेसिजन गाइडेड म्यूनिशन्स का इस्तेमाल किया गया। भारतीय सेना ने बेहद सटीकता के साथ लक्ष्यों को ध्वस्त किया। बाद में जारी सैटेलाइट तस्वीरों और ड्रोन फुटेज में तबाह हुए आतंकी कैंप साफ दिखाई दिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए थे।

पाकिस्तान ने किया पलटवार, भारत ने तोड़ दिया गुरूर

भारत ने शुरुआती कार्रवाई केवल आतंकी ठिकानों तक सीमित रखी थी, लेकिन पाकिस्तान की सेना और सरकार आतंकियों के समर्थन में खुलकर सामने आ गई। पाकिस्तान ने भारत पर जवाबी हमले की कोशिश की, जिसके बाद भारतीय सेना ने अपना रुख और अधिक सख्त कर लिया।

8 से 10 मई के बीच भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 11 बड़े एयरबेस और सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त हमला बोला।

इनमें नूर खान एयरबेस (चकाला), सरगोधा एयरबेस, स्कर्दू एयरबेस, रफीक़ी एयरबेस, सुक्कुर एयरबेस, सियालकोट एयरबेस, पासरूर एयरबेस, चुनियां एयरबेस, भोलारी एयरबेस और जेकबाबाद एयरबेस शामिल थे।

भारतीय हमलों में पाकिस्तान के कई हैंगर, राडार सिस्टम, फाइटर जेट्स और कमांड सेंटर नष्ट हो गए। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और सैटेलाइट विश्लेषणों में दावा किया गया कि पाकिस्तान एयरफोर्स के करीब 20 प्रतिशत इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा था।

भोलारी एयरबेस पर सबसे ज्यादा तबाही हुई, जहां 50 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। इनमें एक स्क्वाड्रन लीडर भी शामिल बताया गया।

भारत की मिसाइलें पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देते हुए सीधे अपने लक्ष्य पर जाकर लगीं। पाकिस्तान इस दौरान भारतीय मिसाइलों को रोकने में लगभग पूरी तरह असफल रहा।

1971 के बाद पहली बार पाकिस्तान की धरती पर इतना बड़ा हमला

ऑपरेशन सिंदूर को इसलिए भी ऐतिहासिक माना गया क्योंकि 1971 के युद्ध के बाद यह पहली बार था जब भारत ने पाकिस्तान की मुख्य भूमि के अंदर इतने व्यापक और गहरे सैन्य हमले किए।

इस पूरे अभियान में भारतीय सेना ने आधुनिक ड्रोन टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट इंटेलिजेंस और जॉइंट कमांड सिस्टम का बेहतरीन उपयोग किया। तीनों सेनाओं के बीच तालमेल ने इस ऑपरेशन को बेहद प्रभावी बना दिया।

भारत की रणनीति साफ थी—आतंकवाद के स्रोत पर सीधा प्रहार। यही वजह रही कि दुनिया भर में भारतीय सैन्य ताकत और स्वदेशी हथियार प्रणालियों की चर्चा होने लगी। ब्रह्मोस और स्कैल्प जैसी मिसाइलों की क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक चर्चा हुई।

पाकिस्तान का “ऑपरेशन बुनयान-उल-मरसूस” हुआ फेल

भारत के हमलों से बौखलाए पाकिस्तान ने “ऑपरेशन बुनयान-उल-मरसूस” नाम से जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू करने की कोशिश की। पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमलों का प्रयास किया गया, लेकिन भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया।

दोनों देशों के बीच कुछ हवाई मुठभेड़ें भी हुईं, जिनमें भारतीय सेना ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया।

हालात तेजी से बिगड़ते देख पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ने लगा। आखिरकार 10 मई 2025 को पाकिस्तान की अपील पर भारत ने सीजफायर को मंजूरी दी और संघर्ष विराम लागू हुआ।

ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं, सिर्फ स्थगित

भारत सरकार और सेना ने साफ कर दिया था कि ऑपरेशन सिंदूर समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि केवल स्थगित किया गया है।

भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि भविष्य में पाकिस्तान की ओर से किसी भी तरह की आतंकी गतिविधि दोहराई गई तो जवाब पहले से कहीं अधिक कठोर होगा।

ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि नया भारत अब केवल आतंकी हमलों की निंदा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आतंक के स्रोत पर जाकर जवाब देने की रणनीति अपनाएगा।

इस अभियान ने पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और उन्हें समर्थन देने वाले ढांचे को बड़ा झटका दिया। साथ ही दुनिया को भारत की सैन्य क्षमता, तकनीकी ताकत और रणनीतिक तैयारी का भी एहसास कराया।


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