
NEET UG 2026 Paper Leak: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने BJP से जुड़े नेता दिनेश बिवाल और उसके भाई मांगीलाल बिवाल को गिरफ्तार किया है। दोनों भाइयों पर आरोप है कि उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा का पेपर 30 लाख रुपये में खरीदा था। इस खुलासे के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज कर दी है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, दोनों भाइयों ने कथित तौर पर सीकर जिले के रहने वाले राकेश मंडवारिया से पेपर खरीदा था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह पेपर पहले परिवार के कुछ बच्चों को मेडिकल परीक्षा में फायदा पहुंचाने के लिए लिया गया था, लेकिन बाद में इसे दूसरे अभ्यर्थियों तक पहुंचाकर मोटी कमाई करने की कोशिश की गई।

सीकर से शुरू हुआ पेपर लीक नेटवर्क
राजस्थान का सीकर जिला पहले भी प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े और पेपर लीक मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। इस बार भी जांच की कड़ी सीकर से ही जुड़ती दिखाई दी। जांच एजेंसियों के अनुसार, राकेश मंडवारिया नाम का व्यक्ति एक कंसल्टेंसी एजेंसी चलाता था और उसी के जरिए कथित तौर पर पेपर लीक नेटवर्क ऑपरेट किया जा रहा था।
CBI को इस नेटवर्क की अहम जानकारी तब मिली जब राकेश मंडवारिया को देहरादून से हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान कई नाम सामने आए, जिसके बाद SOG ने कार्रवाई तेज करते हुए बिवाल भाइयों को गिरफ्तार किया।
BJP से जुड़ा रहा है आरोपी नेता
दिनेश बिवाल जयपुर की जमवा रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में BJP का सक्रिय कार्यकर्ता बताया जा रहा है। वह पार्टी के कई कार्यक्रमों में भाग लेता रहा है और भारतीय जनता युवा मोर्चा में मंत्री पद पर भी जिम्मेदारी निभा चुका है।
मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस ने BJP पर हमला बोल दिया है। कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर राजस्थान सरकार के मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के साथ दिनेश बिवाल की तस्वीर साझा करते हुए सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि आरोपी BJP नेताओं के करीबी रहे हैं।
हालांकि, BJP की ओर से अब तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मेडिकल शिक्षा से जुड़े परिवार के सदस्य भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि दिनेश बिवाल के परिवार के कई सदस्य मेडिकल शिक्षा से जुड़े हुए हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कुछ छात्रों का चयन कथित तौर पर गलत तरीके से करवाया गया हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, CBI अब परिवार के अन्य सदस्यों, छात्रों और संभावित लाभार्थियों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है। एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि पेपर लीक नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
CBI की कस्टडी में दोनों आरोपी
SOG द्वारा गिरफ्तार किए गए दोनों भाइयों को बाद में CBI को सौंप दिया गया। बताया जा रहा है कि SOG ने इस केस में जिन दो दर्जन से अधिक आरोपियों को जांच एजेंसी के हवाले किया था, उनमें दिनेश और मांगीलाल बिवाल भी शामिल थे।
फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं और मेडिकल एडमिशन रैकेट से जुड़े नए खुलासे भी हो सकते हैं।