क्या खत्म होने वाला है Middle East War? अमेरिका-ईरान डील की खबर से दुनिया को राहत, फिर खुल सकता है Hormuz Strait

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Iran US Deal

Iran US Deal: करीब दो महीने से मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सैन्य संघर्ष ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाला है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, जिसका असर भारत समेत कई देशों में ईंधन और महंगाई पर साफ दिखाई दिया।

इसी बीच अब एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौते को लेकर बातचीत तेज हो गई है। अगर यह समझौता सफल होता है तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिर से सामान्य तरीके से जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है।


ईरानी मीडिया ने किया बड़ा दावा

ईरान के सरकारी टीवी चैनल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक अनौपचारिक समझौता मसौदा यानी MOU का प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रस्ताव के तहत ईरान एक महीने के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्ध से पहले जैसी स्थिति बहाल कर सकता है। इसके बाद कमर्शियल शिपिंग और तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य तरीके से शुरू होने की संभावना है।

इसके बदले अमेरिका ईरान के आसपास के क्षेत्रों से अपनी सैन्य मौजूदगी कम करने और कुछ नौसैनिक प्रतिबंध हटाने पर सहमत हो सकता है।


तेल बाजार और भारत को मिल सकती है बड़ी राहत

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से होती है। ऐसे में यहां तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में उछाल देखा गया था।

भारत जैसे बड़े क्रूड ऑयल आयातक देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा। पेट्रोल-डीजल की कीमतों, ट्रांसपोर्ट लागत और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अब अगर होर्मुज स्ट्रेट दोबारा सामान्य होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सप्लाई सुधर सकती है और कीमतों में भी राहत देखने को मिल सकती है।


अभी कई मुद्दों पर बनी हुई है असहमति

हालांकि रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अभी दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। खासतौर पर युद्धपोतों की तैनाती, सुरक्षा व्यवस्था और समुद्री निगरानी जैसे विषयों पर बातचीत जारी है।

बताया जा रहा है कि ओमान के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने को लेकर भी चर्चा हो रही है।


ईरान ने रखी सख्त शर्त

ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी समझौते को लागू करने से पहले अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धताओं का व्यवहारिक प्रमाण देना होगा। ईरान का कहना है कि केवल बयानबाजी के आधार पर वह भरोसा नहीं करेगा।

तेहरान का मानना है कि जब तक अमेरिकी कदम जमीन पर दिखाई नहीं देंगे, तब तक किसी बड़े समझौते को पूरी तरह लागू करना संभव नहीं होगा।


दुनिया की नजर अब अंतिम फैसले पर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच यह समझौता सफल होता है तो इससे न केवल मिडिल ईस्ट में तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ी राहत मिल सकती है। अब पूरी दुनिया की नजर इस संभावित समझौते और Hormuz Strait को लेकर होने वाले अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।


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