
Modi Government 12 Years: किसी भी राष्ट्र के इतिहास में कुछ ऐसे पड़ाव आते हैं, जहां पीछे मुड़कर देखने पर परिवर्तन की व्यापकता दिखाई देती है और आगे देखने पर संभावनाओं का विशाल क्षितिज नजर आता है। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूरे होने का अवसर भी भारत के लिए ऐसा ही एक ऐतिहासिक पड़ाव माना जा रहा है।
यह केवल एक सरकार के कार्यकाल का आंकड़ा नहीं है, बल्कि उस परिवर्तनकारी दौर की कहानी है जिसने भारत के विकास मॉडल, प्रशासनिक संस्कृति, सामाजिक कल्याण, सांस्कृतिक चेतना और वैश्विक पहचान को नई दिशा दी। वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली थी, तब भारत अनेक चुनौतियों से जूझ रहा था। भ्रष्टाचार, नीतिगत जड़ता, प्रशासनिक सुस्ती, वंशवाद, तुष्टिकरण और जनता का शासन व्यवस्था से घटता विश्वास प्रमुख मुद्दे थे।
2014 से शुरू हुआ ‘न्यू इंडिया’ का सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुई यात्रा का लक्ष्य केवल सरकार चलाना नहीं बल्कि शासन की कार्यशैली को बदलना था। “मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस” का मंत्र प्रशासनिक सुधारों की आधारशिला बना।
सरकार ने तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था को बढ़ावा दिया और “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” को विकास की केंद्रीय अवधारणा बनाया। पहली बार गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को नीतियों के केंद्र में रखा गया।
गरीब कल्याण को बनाया शासन का आधार
पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने कई ऐसी योजनाएं शुरू कीं जिनका सीधा लाभ करोड़ों लोगों तक पहुंचा।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना ने गरीब परिवारों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की। आयुष्मान भारत योजना ने करोड़ों लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को पक्का घर मिला, जबकि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि ने किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता प्रदान की।
उज्ज्वला योजना ने करोड़ों महिलाओं को धुएं से भरे रसोईघरों से मुक्ति दिलाई। यह केवल गैस कनेक्शन देने की योजना नहीं थी, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़ा बड़ा सामाजिक अभियान था।
स्वच्छ भारत से बदली सामाजिक सोच
स्वच्छ भारत मिशन ने देश में सफाई को जन आंदोलन का स्वरूप दिया। करोड़ों शौचालयों के निर्माण से न केवल महिलाओं की गरिमा सुरक्षित हुई, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी बढ़ी।
सरकार ने आदिवासी समुदायों के विकास के लिए भी विशेष योजनाएं लागू कीं और उन्हें मुख्यधारा के विकास से जोड़ने का प्रयास किया।
डिजिटल इंडिया ने बदली शासन व्यवस्था
मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में डिजिटल परिवर्तन को भी शामिल किया जाता है। जनधन योजना, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी को जोड़कर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली को मजबूत किया गया।
आज सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचता है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा।
डिजिटल इंडिया अभियान ने भुगतान प्रणाली, सरकारी सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आज दुनिया के सबसे सफल डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म में शामिल है।
आत्मनिर्भर भारत बना नई आर्थिक सोच का प्रतीक
मोदी सरकार ने भारत को केवल उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं, बल्कि विनिर्माण और नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया।
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, मोबाइल निर्माण, स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा दिया गया। आज भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी मजबूत भूमिका दर्ज करा रहा है।
विकास और विरासत का संतुलन
प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की एक विशेषता विकास और सांस्कृतिक विरासत के बीच संतुलन स्थापित करना रही है।
अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक और केदारनाथ पुनर्विकास जैसी परियोजनाओं ने भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दी।
हाल ही में शुरू किया गया ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ भी भारत की प्राचीन पांडुलिपियों और ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बड़े फैसलों से बदली राष्ट्रीय तस्वीर
मोदी सरकार के 12 वर्षों में कई ऐसे निर्णय लिए गए जिन्होंने राष्ट्रीय राजनीति और प्रशासन को नई दिशा दी।
अनुच्छेद 370 का निरसन, तीन तलाक पर प्रतिबंध, नक्सलवाद के खिलाफ सख्त अभियान और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों को सरकार की बड़ी उपलब्धियों के रूप में देखा जाता है।
इन कदमों को सरकार ने सामाजिक न्याय, संवैधानिक समानता और राष्ट्रीय एकता से जोड़कर प्रस्तुत किया।
वैश्विक मंच पर बढ़ा भारत का कद
विदेश नीति के क्षेत्र में भी भारत की भूमिका में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
“लुक ईस्ट” से “एक्ट ईस्ट” नीति तक, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से लेकर ग्लोबल साउथ तक भारत की सक्रियता बढ़ी है। जी-20 की सफल अध्यक्षता ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी।
आज भारत केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है।
विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष में नई उपलब्धियां
चंद्रयान, आदित्य मिशन और अन्य अंतरिक्ष कार्यक्रमों ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया है।
सीमित संसाधनों में बड़े परिणाम हासिल करने की भारतीय क्षमता को दुनिया ने सराहा है और भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में अग्रणी देशों की कतार में खड़ा हुआ है।
बदली सोच, बढ़ा आत्मविश्वास
मोदी सरकार के 12 वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल योजनाएं और परियोजनाएं नहीं, बल्कि भारतीय समाज की बदलती मानसिकता मानी जा रही है।
भारत आज कमी और निर्भरता की सोच से निकलकर आत्मविश्वास और उपलब्धि की मानसिकता की ओर बढ़ा है। देश का युवा वर्ग अपनी संस्कृति, विरासत और वैश्विक अवसरों के प्रति पहले से अधिक जागरूक हुआ है।
विकसित भारत की ओर बढ़ता देश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को केवल योजनाएं नहीं दीं, बल्कि विकसित भारत का स्पष्ट लक्ष्य भी दिया। सरकार का मानना है कि 2014 से 2026 तक का कालखंड परिवर्तन की मजबूत नींव रखने का दौर रहा है, जबकि आने वाले वर्ष विकसित भारत के निर्माण की दिशा में निर्णायक साबित होंगे।
आज भारत अपनी क्षमताओं पर भरोसा करते हुए आत्मनिर्भर, समृद्ध और वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर है। यही कारण है कि मोदी सरकार के 12 वर्षों को समर्थक ‘नए भारत की आधारशिला’ और आलोचक भी भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली दौरों में से एक मानते हैं।
देश अब केवल संभावनाओं का राष्ट्र नहीं, बल्कि उपलब्धियों का राष्ट्र बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।