माफियाओं से लेकर सोशल मीडिया पर भौकाल दिखाने वालों तक पुलिस की नजर, DGP राजीव कृष्ण का बड़ा बयान

Spread the love & Share it

DGP Rajeev Krishna on Mafia Action

DGP Rajeev Krishna on Mafia Action: उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने स्पष्ट कहा है कि राज्य में माफियाओं, संगठित अपराधियों और सोशल मीडिया पर दबंगई का प्रदर्शन करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की नजर प्रदेश, जोन, जिला ही नहीं बल्कि मोहल्ला स्तर तक सक्रिय अपराधियों पर बनी हुई है और उन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।

रविवार को वाराणसी पुलिस लाइन सभागार में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डीजीपी ने कहा कि पिछले आठ से दस वर्षों में उत्तर प्रदेश में माफिया नेटवर्क के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया है। इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है और आगे भी इसी तरह की सख्ती जारी रहेगी।

महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता

डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस की प्राथमिकताएं पूरी तरह स्पष्ट हैं। महिला सुरक्षा, नागरिकों और व्यापारियों की सुरक्षा, बेहतर कानून-व्यवस्था, सड़क दुर्घटनाओं में कमी, सुगम यातायात व्यवस्था और साइबर अपराधों पर नियंत्रण पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। विशेष रूप से महिला अपराधों के मामलों में कमी दर्ज की गई है, जो पुलिस की सक्रियता और प्रभावी कार्यप्रणाली को दर्शाता है।

ट्रैफिक जाम से राहत के लिए तकनीक का सहारा

डीजीपी ने बताया कि प्रदेश के 20 जिलों में लगभग ढाई महीने पहले “रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन” योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत आधुनिक तकनीक और डिजिटल डेटा की मदद से यातायात संबंधी समस्याओं का विश्लेषण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि गूगल से प्राप्त ट्रैफिक डेटा के आधार पर उन मार्गों की पहचान की जा रही है जहां जाम की समस्या सबसे अधिक रहती है। इससे वास्तविक स्थिति का आकलन कर प्रभावी समाधान तैयार किया जा रहा है।

वाराणसी के 11 प्रमुख कॉरिडोर निगरानी में

राजीव कृष्ण ने जानकारी दी कि वाराणसी में ऐसे 11 प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर और मार्ग चिह्नित किए गए हैं जहां नियमित रूप से जाम की स्थिति बनती है। इसी प्रकार पूरे प्रदेश में लगभग 230 महत्वपूर्ण ट्रैफिक कॉरिडोर की पहचान की गई है।

इन मार्गों पर वाहनों की गति, यात्रा अवधि, जाम की अवधि, अधिकतम और न्यूनतम ट्रैफिक दबाव समेत विभिन्न पहलुओं का डेटा लगातार एकत्र किया जा रहा है। एक सप्ताह, दो सप्ताह और एक महीने के आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण कर यातायात प्रबंधन की नई रणनीति तैयार की जा रही है।

तकनीक आधारित पुलिसिंग से मिलेगा बेहतर परिणाम

डीजीपी ने विश्वास जताया कि तकनीक आधारित ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली लागू होने के बाद जाम की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि डेटा आधारित निर्णय लेने से यातायात व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और आम नागरिकों को राहत मिलेगी।


Spread the love & Share it

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *