
Chandauli News: प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर चंदौली जिले के नरवन परगना क्षेत्र में किसानों का विरोध तेज होता जा रहा है। सोमवार को बरहनी ब्लॉक के परेवा गांव में ‘जमीन बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले आयोजित बैठक में सैकड़ों किसानों ने एकजुट होकर एक्सप्रेसवे परियोजना के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। किसानों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे अपनी उपजाऊ कृषि भूमि किसी भी कीमत पर एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए नहीं देंगे।
बैठक की अगुवाई किसान नेता एवं ‘जमीन बचाओ संघर्ष समिति’ के संरक्षक सुमंत सिंह अन्ना ने की। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना नरवन परगना के कृषि प्रधान इलाके के लिए गंभीर संकट साबित हो सकती है। यदि यह परियोजना वर्तमान प्रस्तावित मार्ग से गुजरती है तो बड़ी संख्या में किसान भूमिहीन हो जाएंगे और उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।
खेती ही जीवन का आधार, जमीन बचाने के लिए करेंगे संघर्ष
सुमंत सिंह अन्ना ने कहा कि नरवन परगना क्षेत्र की भूमि अत्यंत उपजाऊ है और यहां के अधिकांश परिवार पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं। ऐसे में किसानों की जमीन अधिग्रहित होने का सीधा असर उनके रोजगार, परिवार और भविष्य पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसान अंतिम दम तक अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष करेंगे और किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं हटेंगे।
एक्सप्रेसवे से दो हिस्सों में बंट जाएगी खेती की जमीन
बैठक में किसान नेता अशोक सिंह ने प्रस्तावित परियोजना के संभावित प्रभावों को विस्तार से रखा। उन्होंने बताया कि विंध्य एक्सप्रेसवे का प्रस्तावित मार्ग कर्मनाशा नदी के किनारे बाईं ओर से गुजरने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो नरवन परगना की उपजाऊ कृषि भूमि दो हिस्सों में विभाजित हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में भारी परेशानी होगी। कृषि यंत्र, ट्रैक्टर, सिंचाई संसाधन और अन्य आवश्यक उपकरण खेतों तक ले जाना मुश्किल हो जाएगा, जिससे खेती-किसानी पर सीधा असर पड़ेगा।
आंदोलन की चेतावनी, जल्द होगी किसानों की महापंचायत
बैठक के दौरान किसानों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे। किसानों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सैकड़ों की संख्या में सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
इसके साथ ही जल्द ही क्षेत्रीय स्तर पर एक विशाल किसान महापंचायत आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया, जिसमें आगामी रणनीति तय की जाएगी और सरकार तक किसानों की आवाज पहुंचाई जाएगी।
बड़ी संख्या में जुटे किसान और ग्रामीण
बैठक में किसान नेता प्रवीण तिवारी, समरेंद्र बहादुर सिंह, अवनीश सिंह, अनुज सिंह, निखिल कुमार सिंह, दीपक सिंह, टनटन साव, कमला साह, रवि गुप्ता, अनुज कुमार, सूरज गुप्ता, छोटेलाल गुप्ता, हेमंत साव, रमाशंकर सिंह, अक्षैबर गुप्ता, पिंटू और सौरभ सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
किसानों का कहना है कि विकास परियोजनाओं का वे विरोध नहीं करते, लेकिन ऐसी योजनाएं किसानों की आजीविका और उपजाऊ कृषि भूमि की कीमत पर लागू नहीं होनी चाहिए। अब क्षेत्र के लोगों की निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई और प्रस्तावित महापंचायत पर टिकी हुई हैं।