
Bharat Tiwari Encounter: बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस को हवा दे दी है। जिस पुलिस अधिकारी के खिलाफ इस मामले में हत्या की प्राथमिकी दर्ज है, उसे बिहार सरकार ने नई जिम्मेदारी सौंप दी है। सरकार के इस फैसले पर भरत तिवारी के परिवार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ बताया है। दूसरी ओर, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि केवल FIR दर्ज होने से किसी सरकारी अधिकारी की सेवा स्वतः समाप्त नहीं होती, लेकिन ऐसे मामलों में प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर मामला?
पूरा मामला 17 जून 2026 का है। बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस की कथित मुठभेड़ में भरत तिवारी की मौत हो गई थी। पुलिस ने इसे एनकाउंटर बताया, जबकि मृतक के परिवार ने शुरुआत से ही इसे फर्जी मुठभेड़ करार दिया।
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भरत तिवारी के शरीर पर पांच गोलियां लगने की पुष्टि हुई। इसके बाद परिवार की शिकायत पर कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या सहित अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।
हत्या के आरोपी अधिकारी को मिली नई जिम्मेदारी
1 जुलाई को बिहार सरकार ने 12 आईपीएस और 53 डीएसपी अधिकारियों के तबादले की सूची जारी की। इसी सूची में तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा का भी नाम शामिल था।
राजेश कुमार शर्मा उन्हीं अधिकारियों में शामिल हैं, जिनके खिलाफ भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में हत्या की FIR दर्ज की गई थी। घटना के बाद उन्हें लाइन हाजिर किया गया था, लेकिन अब उन्हें पटना स्थित मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (Prohibition and State Narcotics Control Bureau) में डीएसपी के पद पर तैनात कर दिया गया है।
यही फैसला अब नए विवाद का कारण बन गया है।
भरत तिवारी की मां बोलीं- सरकार कर रही है लीपापोती
नई पोस्टिंग के बाद भरत तिवारी की मां आशा देवी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिस अधिकारी पर उनके बेटे की हत्या का आरोप है, उसे दंडित करने के बजाय नई जिम्मेदारी सौंप दी गई।
उन्होंने कहा कि घटना के बाद कई नेता, मंत्री, विधायक और सामाजिक कार्यकर्ता उनके गांव पहुंचे थे और इंसाफ दिलाने का भरोसा देकर लौटे थे। अब समय आ गया है कि वे अपने वादे पूरे करें।
आशा देवी का आरोप है कि सरकार पूरे मामले में कार्रवाई करने के बजाय उसे दबाने की कोशिश कर रही है।
क्या FIR के बाद अधिकारी की पोस्टिंग नहीं हो सकती?
इस पूरे विवाद के बीच एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू भी सामने आता है।
कानूनी जानकारों के अनुसार किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ केवल FIR दर्ज हो जाने से उसकी नौकरी समाप्त नहीं होती और न ही उसकी पोस्टिंग पर स्वतः रोक लगती है। यदि संबंधित अधिकारी निलंबित नहीं है, तो सरकार प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार उसे किसी अन्य पद या विभाग में तैनात कर सकती है।
कई मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को घटना स्थल वाले क्षेत्र से हटाकर दूसरी जगह भेजा जाता है। इसलिए नई पोस्टिंग को कानूनी रूप से न तो सजा माना जाता है और न ही क्लीन चिट।
फिर भी क्यों उठ रहे हैं सवाल?
हालांकि कानूनी प्रक्रिया अलग है, लेकिन प्रशासनिक फैसले पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि संबंधित अधिकारी के खिलाफ हत्या जैसे गंभीर आरोपों की जांच अभी जारी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अधिकारी को कानून लागू कराने वाली महत्वपूर्ण एजेंसी में तैनात करना जनता के बीच गलत संदेश दे सकता है। सुप्रीम कोर्ट भी कई मामलों में स्पष्ट कर चुका है कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।
कौन सा विभाग संभालेंगे राजेश कुमार शर्मा?
राजेश कुमार शर्मा को जिस विभाग में तैनात किया गया है, वह बिहार का मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो है।
यह एजेंसी राज्य में शराबबंदी कानून लागू कराने, अवैध शराब की तस्करी रोकने, नशीले पदार्थों के नेटवर्क पर कार्रवाई करने और ड्रग सिंडिकेट की निगरानी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती है।
यही वजह है कि इस नियुक्ति को लेकर सार्वजनिक बहस और तेज हो गई है।
जांच कहां तक पहुंची?
भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद बढ़ने के बाद 23 जून को शाहपुर थाना प्रभारी राजेश मालाकार को निलंबित कर दिया गया था। साथ ही तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया।
मामले की जांच फिलहाल जारी है और पुलिस की कार्रवाई पहले से ही सवालों के घेरे में है।
सरकार की ओर से नहीं आई प्रतिक्रिया
आरोपी अधिकारी की नई पोस्टिंग को लेकर बिहार सरकार की ओर से अब तक कोई अलग आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
हालांकि, इस प्रशासनिक फैसले के बाद भरत तिवारी एनकाउंटर मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है और अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां आगे क्या कार्रवाई करती हैं।