सीरिया पर अमेरिका का यू-टर्न! ट्रंप ने उठाया बड़ा कदम, क्या खत्म होगा 47 साल पुराना आतंकवाद का टैग?

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Donald Trump Syria News

Donald Trump Syria News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व की राजनीति से जुड़ा एक बड़ा संकेत दिया है। ट्रंप प्रशासन ने सीरिया को अमेरिका की ‘State Sponsor of Terrorism’ (आतंकवाद प्रायोजक देश) सूची से हटाने की दिशा में औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि इस संबंध में राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस को आधिकारिक रूप से सूचित कर दिया है। माना जा रहा है कि अगर यह फैसला लागू होता है तो करीब 47 वर्षों बाद सीरिया को इस सूची से बाहर किया जाएगा।

NATO समिट में ट्रंप ने दिया बड़ा संकेत

तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित NATO समिट 2026 के दौरान ट्रंप ने सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मुलाकात की। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि सीरिया ने हाल के समय में सकारात्मक कदम उठाए हैं और अब उसे आतंकवाद प्रायोजक देशों की सूची से बाहर निकालने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि यह फैसला सीरिया के लिए नए आर्थिक अवसरों का रास्ता खोल सकता है और वहां के लोगों को बेहतर भविष्य मिल सकता है।

मार्को रुबियो बोले- आर्थिक पुनर्निर्माण का खुलेगा रास्ता

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि कांग्रेस को औपचारिक सूचना भेज दी गई है। उनके अनुसार, यदि प्रक्रिया पूरी होती है तो सीरिया पर लगे कई आर्थिक प्रतिबंधों में राहत मिल सकती है, जिससे निवेश, व्यापार और पुनर्निर्माण को गति मिलेगी।

47 साल से अमेरिका की ब्लैकलिस्ट में है सीरिया

सीरिया को अमेरिका ने दिसंबर 1979 में आतंकवाद प्रायोजक देशों की सूची में शामिल किया था। इसके बाद दशकों तक उस पर कड़े आर्थिक और राजनयिक प्रतिबंध लागू रहे।

हालांकि दिसंबर 2024 में पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार के पतन के बाद अमेरिकी राजनीति में यह मांग लगातार उठ रही थी कि बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए सीरिया की स्थिति की दोबारा समीक्षा की जाए। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों के कई सांसद इस फैसले के पक्ष में रहे हैं।

अमेरिका-सीरिया संबंध सामान्य करने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन का यह कदम दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले अमेरिका हयात तहरीर अल-शाम (HTS), जिसे पहले अल-नुसरा फ्रंट के नाम से जाना जाता था, को विदेशी आतंकवादी संगठनों की सूची से भी हटा चुका है।

यही संगठन बशर अल-असद सरकार के खिलाफ विद्रोह का प्रमुख चेहरा था और वर्तमान अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा इसी संगठन का नेतृत्व कर चुके हैं।

लेबनान और इजरायल को लेकर भी ट्रंप का बयान

NATO समिट के दौरान ट्रंप ने दक्षिण लेबनान में तैनात इजरायली सेना पर भी टिप्पणी की। उन्होंने उम्मीद जताई कि इजरायल भविष्य में अपनी सेना को वहां से वापस बुलाने पर विचार करेगा। हालांकि उन्होंने इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई।

इससे पहले G7 सम्मेलन के दौरान भी ट्रंप ने कहा था कि लेबनान से जुड़े सुरक्षा मुद्दों को सुलझाने में सीरिया और उसके अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कौन हैं अहमद अल-शरा?

अहमद अल-शरा, जिन्हें पहले अबू मोहम्मद अल-जुलानी के नाम से जाना जाता था, दिसंबर 2024 में बशर अल-असद सरकार के पतन के बाद सीरिया की सत्ता में आए। एक समय अमेरिका ने उन पर 1 करोड़ डॉलर (करीब 95 करोड़ रुपये) का इनाम घोषित किया था। हालांकि 2024 के अंत में अमेरिका ने राजनयिक वार्ताओं के बाद यह इनामी घोषणा वापस ले ली थी।

क्या होगा इस फैसले का असर?

यदि अमेरिकी कांग्रेस इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो सीरिया पर लगे कई आर्थिक प्रतिबंधों में राहत मिल सकती है। इससे विदेशी निवेश बढ़ने, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सुधार आने और युद्धग्रस्त देश के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को नई गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह फैसला मध्य पूर्व की बदलती कूटनीति और अमेरिका की नई विदेश नीति का भी अहम संकेत माना जा रहा है।


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