
Chandauli News: चंदौली लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर जिले के किसानों से जुड़े भूमि अधिग्रहण और मुआवजे का अहम मुद्दा उठाया। सांसद ने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन बदले में उन्हें बाजार मूल्य के अनुरूप उचित मुआवजा नहीं मिल रहा। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप कर किसानों को न्याय दिलाने की मांग की।
धान उत्पादन का प्रमुख जिला, फिर भी किसानों को नहीं मिल रहा उचित मूल्य
प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान सांसद वीरेंद्र सिंह ने बताया कि चंदौली देश के प्रमुख धान उत्पादक जिलों में शामिल है। जिले की लगभग 90 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है और खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है।
उन्होंने कहा कि पिछले करीब 15 वर्षों से सर्किल रेट में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। यही कारण है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों को उनकी जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
केरल का उदाहरण देकर उठाया मुआवजे में अंतर का मुद्दा
सांसद ने प्रधानमंत्री के समक्ष विभिन्न राज्यों में भूमि अधिग्रहण के मुआवजे में अंतर का मुद्दा भी रखा। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के कुछ राज्यों, विशेषकर केरल में किसानों को भूमि अधिग्रहण के बदले प्रति हेक्टेयर 30 से 40 करोड़ रुपये तक का मुआवजा मिलने के उदाहरण हैं।
इसके विपरीत, चंदौली और पूर्वांचल के किसानों को अधिकतम लगभग 2 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर तक ही मुआवजा मिल पाता है। सांसद ने इसे किसानों के साथ असमानता बताते हुए इस अंतर को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
‘विकास जरूरी है, लेकिन किसानों की कीमत पर नहीं’
वीरेंद्र सिंह ने कहा कि सड़क, एक्सप्रेस-वे, रेलवे और अन्य आधारभूत परियोजनाएं देश के विकास के लिए आवश्यक हैं, लेकिन विकास का पूरा भार केवल किसानों पर नहीं डाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिन किसानों की उपजाऊ जमीन सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए ली जा रही है, उन्हें ऐसा मुआवजा मिलना चाहिए जिससे उनका और उनके परिवार का भविष्य सुरक्षित रह सके।
प्रधानमंत्री से की किसानों के हितों को प्राथमिकता देने की अपील
सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। साथ ही बाजार मूल्य के अनुरूप सम्मानजनक और न्यायसंगत मुआवजा सुनिश्चित किया जाए, ताकि विकास कार्यों और किसानों के अधिकारों के बीच संतुलन बना रहे। उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना समावेशी विकास की कल्पना अधूरी रहेगी।