BHU Dog Attack Case: CCTV जांच की मांग, पूर्व छात्रों ने महिला प्रोफेसर को बदनाम करने की साजिश का लगाया आरोप

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BHU Dog Attack Case

BHU Dog Attack Case: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पूर्व छात्रों और शहर के गणमान्य नागरिकों की बैठक मंगलवार को विश्वविद्यालय स्थित श्री विश्वनाथ मंदिर परिसर में हुई। बैठक में हाल में कथित कुत्ते के काटने से घायल हुए बालक के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज की जांच किए जाने की मांग उठाई गई।

बैठक में हिंदी विभाग की महिला प्रोफेसर द्वारा ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायल बालक का हालचाल लेने और उसके परिजनों से मुलाकात करने की घटना पर संतोष जताया गया।

CCTV फुटेज के आधार पर जांच की मांग

बैठक में शामिल लोगों ने दावा किया कि उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के अनुसार बालक के सिर में चोट मोटरसाइकिल की टक्कर से लगी है। उनका कहना था कि महिला प्रोफेसर ने घटना की पूरी जानकारी प्रॉक्टोरियल बोर्ड को दी थी, इसके बावजूद सीसीटीवी फुटेज देखने की दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई गई।

बैठक में कहा गया कि पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए सबसे पहले संबंधित सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी जानी चाहिए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि फुटेज की जांच नहीं किए जाने से महिला प्रोफेसर को बदनाम करने की साजिश की आशंका पैदा होती है।

परिसर में आवारा पशुओं और कुत्तों को लेकर उठे सवाल

बैठक में बीएचयू परिसर में बाहर से आने वाले पशुओं और अनियंत्रित सांडों की मौजूदगी को लेकर भी चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी गेटों पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के बावजूद परिसर में बाहरी गाय और सांड खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं। कई बार इनके हमलों में लोग घायल हो चुके हैं।

बैठक में वाराणसी नगर निगम की व्यवस्था का भी हवाला दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि नगर निगम शहर में दुधारू पशुओं के पालन पर कार्रवाई करते हुए उन्हें बाहर भेज रहा है, जबकि बीएचयू परिसर में आवारा पशुओं की समस्या बनी हुई है।

पालतू कुत्तों को लेकर संपदा विभाग से मांगा जवाब

बैठक में आरोप लगाया गया कि कुछ लोग अपने पालतू कुत्तों को वाहनों में बैठाकर विश्वविद्यालय परिसर में लाते हैं। वक्ताओं का कहना था कि ऐसे कुत्तों के कारण परिसर में लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं और कई बार हमले की घटनाएं भी सामने आई हैं।

पूर्व छात्रों और नागरिकों ने सवाल उठाया कि विश्वविद्यालय के संपदा विभाग ने पालतू कुत्तों को लेकर क्या दिशा-निर्देश जारी किए हैं और उनके उल्लंघन पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। बैठक में इस पूरे मामले की जांच के दायरे में संपदा विभाग को भी शामिल करने की मांग की गई।

तेज रफ्तार मोटरसाइकिलों पर भी जताई चिंता

बैठक में विश्वविद्यालय परिसर में तेज रफ्तार और अनियंत्रित मोटरसाइकिल चलाने की समस्या भी उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि कुछ युवक परिसर में बेहद तेज गति से वाहन चलाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

बैठक में दावा किया गया कि कई वर्ष पहले मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर रस्तोगी की मौत भी मोटरसाइकिल से जुड़ी दुर्घटना में हुई थी। वक्ताओं ने परिसर में यातायात नियमों के प्रभावी पालन और अनियंत्रित वाहन चालकों पर कार्रवाई की मांग की।

प्रॉक्टोरियल बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

बैठक में प्रॉक्टोरियल बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय की सुरक्षा और व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, इसलिए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उनका कहना था कि केवल बयानबाजी से समस्या का समाधान नहीं होगा और वास्तविक तथ्यों की जांच जरूरी है।

सर सुंदरलाल अस्पताल को लेकर भी उठे गंभीर आरोप

बैठक में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल की व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि अस्पताल में दलाली की समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक ने भी अपने विदाई साक्षात्कार में इस संबंध में अपनी लाचारी जाहिर की थी, लेकिन इस विषय पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई।

बैठक में अस्पताल परिसर में लंबे समय से संचालित उमंग फार्मेसी की दवा दुकान को लेकर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि यह दुकान कथित तौर पर अवैध रूप से संचालित हो रही है और इससे विश्वविद्यालय को 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। बैठक में इस मामले में भी विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की गई।

कुलपति से हस्तक्षेप की मांग

बैठक में सभी मुद्दों पर चर्चा के बाद सर्वसम्मति से बीएचयू के कुलपति से हस्तक्षेप करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि बालक से जुड़ी घटना में सीसीटीवी फुटेज, सुरक्षा व्यवस्था, पशुओं की मौजूदगी और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी सहित सभी पहलुओं की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. बहादुर सिंह यादव ने की। इस दौरान छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री डॉ. सूबेदार सिंह, राजेश यादव (सीर), महेंद्र सिंह यादव, धर्मेंद्र सिंह, मनीष पांडे सहित अन्य लोग मौजूद रहे।


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