
Chandauli News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए गेहूं खरीद प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य नहीं रहेगी। इस फैसले से प्रदेश के करीब 80 लाख किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो अब बिना किसी तकनीकी अड़चन के अपनी उपज बेच सकेंगे।
चंदौली के हजारों किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
चंदौली जिले में इस फैसले का खास असर देखने को मिलेगा। यहां लगभग 34 हजार ऐसे किसान हैं, जिनकी फार्मर रजिस्ट्री अब तक नहीं हो पाई थी। इन किसानों को अब तक गेहूं बेचने में परेशानी हो रही थी, लेकिन नए आदेश के बाद वे सीधे सरकारी केंद्रों पर जाकर अपनी फसल बेच सकेंगे।
बिचौलियों से राहत, मिलेगा सही दाम
अब तक रजिस्ट्री न होने के कारण कई किसान बिचौलियों के चंगुल में फंस रहे थे। जहां सरकारी दर 2585 रुपये प्रति क्विंटल है, वहीं बिचौलिए 2300 से 2400 रुपये में गेहूं खरीद रहे थे। सरकार के इस फैसले के बाद किसानों को सीधे सरकारी मूल्य पर गेहूं बेचने का मौका मिलेगा, जिससे उनकी आय में भी सुधार होगा।
खतौनी और पहचान पत्र से होगी खरीद
सरकार ने स्पष्ट किया है कि गेहूं खरीद पहले की तरह खतौनी और पहचान पत्र के आधार पर ही की जाएगी। इससे प्रक्रिया सरल और तेज होगी, जिससे खरीद केंद्रों पर भीड़ और देरी की समस्या कम होने की उम्मीद है।
रजिस्ट्री की बाध्यता हटाने की वजह
सरकार ने यह निर्णय तब लिया जब देखा गया कि फार्मर रजिस्ट्री की अनिवार्यता के कारण खरीद प्रक्रिया धीमी पड़ रही थी। कई किसान तकनीकी दिक्कतों या जानकारी के अभाव में पंजीकरण नहीं करा पा रहे थे, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा था।
भविष्य की योजनाओं के लिए जरूरी रहेगी रजिस्ट्री
हालांकि फिलहाल गेहूं खरीद में राहत दी गई है, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि भविष्य की योजनाओं जैसे किसान सम्मान निधि, खाद और बीज सब्सिडी के लिए फार्मर रजिस्ट्री जरूरी रहेगी। इसलिए किसानों को आगे चलकर अपना पंजीकरण जरूर कराना होगा।
