
Chandauli News: कभी पिछड़े जिलों में गिने जाने वाला चंदौली आज विकास की नई मिसाल बन चुका है। पिछले 25 वर्षों में यहां बुनियादी ढांचे, शिक्षा, सुरक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिले हैं।
सड़कों, पुलों और ओवरब्रिज के जाल ने न सिर्फ जिले की तस्वीर बदली है, बल्कि यहां के लोगों के जीवन स्तर को भी बेहतर बनाया है।
हाईवे और रिंग रोड से मजबूत हुई कनेक्टिविटी
चंदौली में वर्ष 2006 में नेशनल हाईवे बनने के बाद विकास की रफ्तार तेज हुई। इसके बाद 2025 में चंदौली-सकलडीहा-सैदपुर मार्ग को स्टेट हाईवे का दर्जा मिला, जबकि 2026 में पड़ाव से गोधना तक दूसरा स्टेट हाईवे तैयार हुआ।
वहीं, 2025 में रिंग रोड के निर्माण ने यातायात व्यवस्था को और अधिक सुगम बना दिया।

ओवरब्रिज और पुलों ने बदली आवाजाही की तस्वीर
जिले में पांच प्रमुख ओवरब्रिजों का निर्माण हुआ, जिसमें चंदौली, सैयदराजा (दो स्थान), ताराजीवनपुर के पास रेलवे ओवरब्रिज और सिंघीताली का हाईवे ओवरब्रिज शामिल है।
इसके अलावा गंगा नदी पर तिरगांवा, बलुआ और महेवा में पुल बने, जबकि कर्मनाशा नदी पर सैयदराजा और शहाबगंज में भी दो पुलों का निर्माण हुआ, जिससे आवागमन बेहद आसान हो गया।
नक्सल गतिविधियां खत्म, सुरक्षा में बड़ा सुधार
चंदौली के वनांचल क्षेत्र में कभी नक्सल गतिविधियां बड़ी चुनौती थीं, लेकिन वर्ष 2015 के बाद यह पूरी तरह समाप्त हो गईं।
साल 2023 में सीआरपीएफ का ग्रुप सेंटर स्थापित होने से जिले की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हुई है, जिससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी हुई है।
जनसंख्या और साक्षरता में लगातार वृद्धि
चंदौली की जनसंख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है। वर्ष 2001 में जहां आबादी 16.43 लाख थी, वह 2011 में बढ़कर 19.53 लाख हो गई और 2026 तक इसके लगभग 23.8 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी सुधार देखने को मिला है। साक्षरता दर 2001 में 59.7 प्रतिशत से बढ़कर 2011 में 71.48 प्रतिशत हो गई और यह ग्राफ लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है।
पर्यटन को मिले नए पंख
वनांचल क्षेत्र में पर्यटन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पहले जहां राजदरी-देवदरी जलप्रपात ही मुख्य आकर्षण था, वहीं अब औरवाटाड़ और छानपाथर दरी जैसे नए पर्यटन स्थल भी विकसित हो चुके हैं।
पर्यटन विभाग ने राजदरी-देवदरी जलप्रपात पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च कर बुनियादी सुविधाएं विकसित कीं, जिससे पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। पहले हर महीने केवल 10-15 पर्यटक आते थे, अब यह संख्या बढ़कर 10 हजार से अधिक हो गई है।