
India Economic Changes 2026: देश में 10 मई से 13 मई 2026 के बीच आर्थिक मोर्चे पर ऐसे कई बड़े घटनाक्रम सामने आए, जिन्होंने आम आदमी से लेकर कारोबारियों तक सभी की चिंता बढ़ा दी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार, RBI और कई बड़ी कंपनियों ने अहम फैसले लिए। इन फैसलों का असर सीधे लोगों की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाला है।
इन चार दिनों में सोना-चांदी की कीमतों से लेकर दूध, पेट्रोल-डीजल, रुपये और रोजगार कानून तक कई बड़े बदलाव देखने को मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से ईंधन बचाने, सोना कम खरीदने और विदेशी यात्राएं टालने की अपील की।

पीएम मोदी की अपील ने बढ़ाई चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से कई अहम अपीलें कीं। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए लोगों को पेट्रोल-डीजल की खपत कम करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने एक साल तक अनावश्यक सोना खरीदने से बचने और विदेश यात्राएं टालने की सलाह दी।
पीएम मोदी ने घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कंपनियों को फिर से “वर्क फ्रॉम होम” मॉडल अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि इससे ईंधन की बचत और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम किया जा सकता है। किसानों से उर्वरकों के इस्तेमाल में 50 प्रतिशत तक कटौती करने की भी अपील की गई।
सोना-चांदी पर बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी
सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर बड़ा कदम उठाया। पहले जहां इन धातुओं पर 6 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी लगती थी, अब इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। इसमें 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत कृषि अवसंरचना विकास उपकर (AIDC) शामिल है।
सरकार का मानना है कि इससे सोना-चांदी का आयात घटेगा और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा। हालांकि, इस फैसले के बाद घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। दूसरी ओर कई ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
दूध महंगा, आम आदमी पर बढ़ा बोझ
महंगाई के बीच डेयरी कंपनियों ने भी उपभोक्ताओं को झटका दिया। Amul और Mother Dairy ने दूध की कीमतों में प्रति लीटर 2 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी। दिल्ली-NCR समेत कई शहरों में नई कीमतें लागू हो चुकी हैं।
दूध रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा होने के कारण इसका असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ेगा। खासकर मध्यम वर्ग और बड़े परिवारों के खर्च में बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने के संकेत
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिए कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचता है तो सरकार के लिए तेल कंपनियों का बोझ उठाना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात जारी रहे तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा सकती है।
इस समय सरकार और तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी कीमतों का बोझ खुद उठा रही हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा कर पाना आसान नहीं होगा।
रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया
कच्चे तेल के बढ़ते आयात बिल और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 95.70 तक फिसल गया, जिसने बाजार में चिंता बढ़ा दी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो रुपये पर और दबाव बढ़ सकता है। इसका असर आयात लागत और महंगाई दोनों पर पड़ेगा।
महंगाई ने फिर बढ़ाई चिंता
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खुदरा महंगाई दर (CPI) बढ़कर 3.48 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 4.20 प्रतिशत दर्ज की गई। ग्रामीण इलाकों में इसका असर अधिक देखने को मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल कीमतों में और तेजी आती है तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है।
मनरेगा की जगह नया रोजगार कानून
केंद्र सरकार ने 20 साल पुराने MGNREGA कानून को खत्म कर नया कानून लागू करने का ऐलान किया है। 1 जुलाई 2026 से “विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (VB-G RAM G)” लागू होगा।
नई योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को अब 100 दिन की बजाय 125 दिन रोजगार की गारंटी दी जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण रोजगार व्यवस्था और मजबूत होगी।
नए लेबर कोड और कर्मचारियों को राहत
सरकार ने नए लेबर कोड की अंतिम गाइडलाइंस भी जारी कर दी हैं। इसके तहत ओवरटाइम करने वाले कर्मचारियों को दोगुनी मजदूरी देना अनिवार्य होगा। महिला कर्मचारियों को सुरक्षा व्यवस्था के साथ सभी शिफ्टों और भारी मशीनरी वाले कार्यों में काम करने की अनुमति भी दी गई है।
एयर इंडिया ने बदले कई अंतरराष्ट्रीय रूट
ईरान संकट और एविएशन फ्यूल की बढ़ती लागत के कारण Air India ने कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बदलाव किया है। जून से अगस्त 2026 के बीच 29 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला लिया गया है।
इसका असर विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है, खासकर पश्चिम एशिया और यूरोप रूट पर यात्रा करने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
आने वाले समय में बढ़ सकती हैं चुनौतियां
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव और गहरा सकता है। महंगाई, ईंधन कीमतें, विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये की स्थिति आने वाले महीनों में सबसे बड़े मुद्दे बने रह सकते हैं।
फिलहाल सरकार खर्च कम करने, आयात घटाने और घरेलू खपत बढ़ाने की रणनीति पर काम करती नजर आ रही है।