पहलगाम हमले में बड़ा खुलासा! टूरिस्ट गाइड चाहते तो बच सकती थीं 26 जानें, NIA चार्जशीट में चौंकाने वाले दावे

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Pahalgam Attack Chargesheet

Pahalgam Attack Chargesheet: पहलगाम आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को कई बड़े सुराग मिले हैं। चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि अगर स्थानीय टूरिस्ट गाइड समय रहते सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दे देते, तो 26 लोगों की जान बचाई जा सकती थी। जांच में यह भी सामने आया है कि हमले के पीछे पाकिस्तान से संचालित आतंकी नेटवर्क सक्रिय था और आतंकियों को स्थानीय स्तर पर मदद मिली थी।

हमले से पहले आतंकियों को मिली थी पनाह

NIA सूत्रों के मुताबिक हमले से एक दिन पहले तीनों आतंकी — फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी — पहलगाम के स्थानीय गाइड परवेज की झोपड़ी में पहुंचे थे। वहां उन्होंने खाना खाया, चाय पी और अल्लाह के नाम पर मदद मांगी।

जांच में सामने आया कि आतंकियों को रोटी, सब्जी और जरूरी सामान भी उपलब्ध कराया गया। जाते समय वे खाना बनाने के बर्तन और राशन भी साथ ले गए थे।

NIA: सूचना मिलती तो टल सकता था हमला

चार्जशीट में दावा किया गया है कि स्थानीय गाइड परवेज और बशीर अहमद ने आतंकियों को बैसरन पार्क के आसपास कई बार देखा था। आतंकियों ने उनसे अमरनाथ यात्रा, सेना की मूवमेंट और सुरक्षा कैंपों को लेकर जानकारी भी ली थी।

सूत्रों के मुताबिक दोनों गाइडों ने यह जानकारी पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को नहीं दी। जांच एजेंसी मानती है कि यदि समय रहते सूचना साझा की जाती, तो हमला रोका जा सकता था।

5 घंटे तक झोपड़ी में रुके थे आतंकी

जांच के अनुसार 21 अप्रैल की शाम आतंकियों को सुरक्षित ठिकाना दिलाने में भी स्थानीय मदद मिली। बशीर अहमद ने पूछताछ में कबूल किया कि उसने तीनों आतंकियों को परवेज की झोपड़ी तक पहुंचाया था।

आतंकी करीब पांच घंटे तक वहीं रुके। इस दौरान उन्होंने बातचीत की, खाना खाया और बाद में मदद के बदले 3000 रुपये भी दिए। अगले दिन हमले से कुछ घंटे पहले दोनों गाइडों ने उन्हीं आतंकियों को बैसरन पार्क के बाहर बैठे देखा था।

TRF के जरिए रची गई ‘False Flag’ साजिश

NIA जांच में यह भी सामने आया कि हमले की जिम्मेदारी लेने वाला टेलीग्राम चैनल पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा से ऑपरेट हो रहा था। जांच एजेंसी के मुताबिक TRF ने पहले हमले की जिम्मेदारी ली, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने पर चैनल हैक होने का दावा कर दिया।

NIA का कहना है कि यह भारतीय एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए पाकिस्तान और लश्कर-ए-तैयबा की ‘False Flag’ रणनीति का हिस्सा था।

पाकिस्तान में खरीदे गए मोबाइल का इस्तेमाल

ऑपरेशन महादेव में मारे गए आतंकियों के पास से बरामद मोबाइल फोन की जांच में पता चला कि दोनों फोन पाकिस्तान में खरीदे गए थे। एक मोबाइल लाहौर और दूसरा कराची से ऑनलाइन खरीदा गया था।

जांच एजेंसी का मानना है कि इससे साफ हो गया है कि पूरी साजिश पाकिस्तान में तैयार की गई थी और आतंकियों को वहीं से निर्देश मिल रहे थे।

‘लंगड़ा’ निकला हमले का मास्टरमाइंड

NIA ने अपनी चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी सैफुल्लाह साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ को मुख्य आरोपी बनाया है। जांच एजेंसी के मुताबिक वही पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड और तीनों आतंकियों का हैंडलर था।

सूत्रों के अनुसार साजिद पाकिस्तान के लाहौर में बैठकर आतंकियों को लाइव निर्देश दे रहा था और लोकेशन शेयर कर रहा था। उसके एक पैर में गोली लगने के बाद नकली टांग लगी हुई है, इसी वजह से उसे ‘लंगड़ा’ कहा जाता है।

कश्मीर में बना चुका है बड़ा नेटवर्क

NIA के मुताबिक सैफुल्लाह साजिद 2005 में जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कर चुका था और उसने दक्षिण कश्मीर में ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया था।

धारा 370 हटने के बाद उसने TRF जैसे प्रॉक्सी संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। एजेंसी का दावा है कि वही ड्रोन के जरिए पाकिस्तान से हथियार भिजवाने और आतंकी गतिविधियों को संचालित करने में शामिल रहा है।

10 लाख का इनामी आतंकी

सैफुल्लाह साजिद पर NIA ने 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया हुआ है। उसका नाम भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शामिल है। जांच एजेंसी के अनुसार वह लाहौर में बैठकर लगातार कश्मीर में आतंकी मॉड्यूल को सक्रिय कर रहा है और बड़े हमलों की साजिश रचता रहा है।


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