UP Green Belt Policy: यूपी में ग्रीन बेल्ट पर सरकार का सख्त एक्शन, 200 वर्गमीटर तक के निर्माण ही होंगे वैध

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UP Green Belt Policy

UP Green Belt Policy: उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रीन बेल्ट और भू-उपयोग के विपरीत किए गए निर्माणों को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब विकास प्राधिकरणों और जिला पंचायतों के बीच लंबे समय से चल रहे नक्शा स्वीकृति विवाद का समाधान कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में 200 वर्गमीटर तक बने निर्माणों को सशर्त वैध माना जाएगा, जबकि इससे बड़े निर्माणों पर ध्वस्तीकरण सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी।

जिला पंचायत से पास नक्शे अब स्वतः वैध नहीं

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश के 29 विकास प्राधिकरणों के अधिसूचित विकास क्षेत्रों और 72 विनियमित क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा स्वीकृत सभी भवन स्वतः वैध नहीं माने जाएंगे।

अब विकास प्राधिकरण संबंधित नक्शों और निर्माणों की भवन उपविधियों के आधार पर जांच करेगा। नियमों के अनुरूप पाए जाने पर ही उनका पंजीकरण और वैधीकरण किया जाएगा।

ग्रीन बेल्ट में 200 वर्गमीटर तक राहत, उससे अधिक पर सख्ती

नई नीति के अनुसार ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में 200 वर्गमीटर तक के भूखंड पर बने मकानों और निर्माणों को शर्तों के साथ वैधता प्रदान की जाएगी।

हालांकि 200 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में किए गए निर्माणों को अवैध माना जाएगा और ऐसे मामलों में ध्वस्तीकरण समेत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि पर्यावरण और नियोजन नियमों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

तालाब, सड़क और सरकारी जमीन पर बने भवन पूरी तरह अवैध

सरकार ने तालाब, नाला, सड़क, राजस्व भूमि और अन्य सार्वजनिक जमीनों पर किए गए निर्माणों को पूरी तरह अवैध घोषित कर दिया है।

ऐसे मामलों में केवल भवन मालिकों पर ही नहीं, बल्कि नक्शा स्वीकृत करने वाले जिला पंचायत के संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं पर भी कार्रवाई की जाएगी।

कन्वर्जन शुल्क लेकर मिलेगी वैधता, 75% तक छूट

ग्रीन बेल्ट को छोड़कर अन्य भू-उपयोग वाले क्षेत्रों में बने निर्माणों को कन्वर्जन शुल्क लेकर वैध किया जाएगा।

सरकार ने लोगों को राहत देते हुए कन्वर्जन शुल्क में 75 प्रतिशत तक की छूट देने का भी निर्णय लिया है। इससे बड़ी संख्या में ऐसे भवन मालिकों को राहत मिल सकती है, जिन्होंने नियोजन नियमों से अलग निर्माण कराए थे।

15 दिन में विकास प्राधिकरणों को सौंपनी होगी पूरी सूची

कैबिनेट के फैसले के अनुसार जिला पंचायतों को 31 मार्च तक स्वीकृत सभी नक्शों और निर्माणों का रिकॉर्ड 15 दिनों के भीतर संबंधित विकास प्राधिकरणों को सौंपना होगा।

इसके बाद विकास प्राधिकरण नियमों के अनुसार जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करेगा।

छह महीने में तैयार होंगे सभी शहरों के मास्टर प्लान

प्रदेश के 17 नगर निगमों समेत कुल 762 नगरीय निकायों में से केवल लगभग 200 क्षेत्रों के ही मास्टर प्लान अभी तक तैयार हैं।

सरकार ने निर्देश दिया है कि शेष सभी क्षेत्रों के मास्टर प्लान अगले छह माह के भीतर तैयार किए जाएं, ताकि अनियोजित विकास और अवैध निर्माणों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

आबादी और कृषि भूमि को लेकर भी स्पष्ट नीति

सरकार ने मास्टर प्लान से बाहर के क्षेत्रों के लिए भी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तय कर दी है।

नई व्यवस्था के अनुसार आबादी क्षेत्र में बने निर्माणों को वैध माना जाएगा। वहीं कृषि भूमि पर उपविधियों के अनुरूप बने आवासीय भवनों और उद्योगों को भी वैधता दी जाएगी तथा उन्हें भविष्य के मास्टर प्लान में शामिल किया जाएगा।

हालांकि कृषि भूमि पर बने मल्टीप्लेक्स, बड़े व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और अन्य वाणिज्यिक निर्माणों को वैधता नहीं मिलेगी।

अवैध निर्माणों पर सरकार का बड़ा संदेश

प्रदेश सरकार का मानना है कि नई नीति से वर्षों से चले आ रहे निर्माण विवादों का समाधान होगा और विकास प्राधिकरणों तथा जिला पंचायतों के अधिकार क्षेत्र भी स्पष्ट होंगे। साथ ही ग्रीन बेल्ट, सार्वजनिक भूमि और कृषि भूमि पर अनियंत्रित निर्माणों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।


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