एक हफ्ते का अल्टीमेटम: चंदौली में फायर सेफ्टी नियम नहीं माने तो स्कूल, अस्पताल और होटल पर होगी सख्त कार्रवाई

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Chandauli News

Chandauli News: चंदौली में बढ़ती अग्निकांड की घटनाओं और सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सख्त हो गया है। सरकारी कार्यालयों से लेकर निजी अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग सेंटरों, होटलों, मैरेज लॉन और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। साफ शब्दों में चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर फायर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित संस्थान को सील किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों एवं प्रबंधकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्ट्रेट में हुई अहम बैठक, सुरक्षा व्यवस्था पर बनी रणनीति

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) राजेश कुमार और अपर पुलिस अधीक्षक अनंत चंद्रशेखर ने की। बैठक में अग्निशमन विभाग, प्रशासनिक अधिकारियों, अस्पतालों, विद्यालयों, कोचिंग संस्थानों, होटल संचालकों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC-2016) और उत्तर प्रदेश शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार विभिन्न श्रेणी के संस्थानों में फायर सेफ्टी मानकों की समीक्षा की गई।

अस्पतालों के लिए सबसे सख्त नियम लागू

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए यहां फायर सेफ्टी नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।

300 वर्ग मीटर तक के अस्पतालों में पर्याप्त अग्निशामक यंत्र, होज रील, मैनुअल फायर अलार्म, छत पर 5000 लीटर पानी की टंकी और 450 लीटर प्रति मिनट क्षमता वाला पंप अनिवार्य होगा।

वहीं 300 वर्ग मीटर से बड़े अथवा दो मंजिल से अधिक वाले अस्पतालों में ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम, स्मोक डिटेक्शन अलार्म, 25 हजार लीटर की ओवरहेड वाटर टैंक, 50 हजार लीटर की अंडरग्राउंड टंकी तथा 900 LPM क्षमता का फायर पंप अनिवार्य रहेगा। 200 वर्ग मीटर से बड़े बेसमेंट में स्प्रिंकलर सिस्टम लगाना भी जरूरी होगा।

सरकारी कार्यालयों में भी लागू होंगे नए सुरक्षा मानक

बैठक में सरकारी कार्यालयों के लिए भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए। भले ही 500 वर्ग मीटर तक के कार्यालयों को फायर एनओसी से छूट हो, लेकिन सभी कार्यालयों में पर्याप्त संख्या में कार्यशील अग्निशामक यंत्र रखना अनिवार्य होगा।

इसके साथ ही प्रत्येक विद्युत वितरण बोर्ड पर MCB और RCCB लगाने, बिजली की ओवरलोडिंग रोकने, कार्यालय बंद होने से पहले सभी विद्युत उपकरण बंद कराने, वार्षिक विद्युत सुरक्षा ऑडिट कराने तथा रिकॉर्ड रूम में अग्निरोधी अलमारियों का उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटरों को भी मिला अल्टीमेटम

जिन संस्थानों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आते हैं, वहां अग्नि सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।

प्रत्येक भवन में पर्याप्त अग्निशामक यंत्र, साफ एवं बाधारहित निकास मार्ग, आपातकालीन सूचना बोर्ड, फायर ड्रिल, सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षित विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। सीढ़ियों और गलियारों में किसी भी प्रकार का कबाड़ या अवरोध रखने पर भी रोक लगा दी गई है।

होटल और मैरेज लॉन भी प्रशासन की निगरानी में

होटल, गेस्ट हाउस और मैरेज लॉन संचालकों को भी अग्नि सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी वाले ऐसे स्थानों पर सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।

एक सप्ताह में पूरी करनी होगी व्यवस्था

अपर जिलाधिकारी राजेश कुमार ने सभी सरकारी और निजी संस्थानों को एक सप्ताह के भीतर अपनी फायर सेफ्टी व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि अग्निशमन विभाग जल्द ही जनपदभर में विशेष निरीक्षण अभियान चलाएगा। निरीक्षण के दौरान यदि किसी भी संस्थान में फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी पाई गई तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

नियम तोड़े तो संस्थान होगा सील, दर्ज होगी FIR

बैठक में प्रशासन ने दो टूक संदेश दिया कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित संस्थान को तत्काल सील किया जाएगा। साथ ही संस्थान के प्रबंधक, संचालक अथवा जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जन सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

बैठक के अंत में प्रशासन ने सभी विभागों और संस्थानों से अपील की कि अग्नि सुरक्षा केवल कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए सभी संस्थान निर्धारित मानकों का पालन करते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करें, ताकि भविष्य में किसी भी बड़े हादसे से बचा जा सके।


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