
Chandauli News: आगामी मानसून और संभावित बाढ़ की चुनौती को देखते हुए चंदौली जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की अध्यक्षता में बाढ़ आपदा प्रबंधन की अंतर्विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले की नदियों, तटबंधों, राहत व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में डीएम ने स्पष्ट कहा कि बाढ़ प्रबंधन में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से पूरी हों सभी तैयारियां
जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थापित बाढ़ चौकियों और राहत शरणालयों का स्वयं भौतिक सत्यापन करें। राहत शिविरों में स्वच्छ पेयजल, बिजली, शौचालय, साफ-सफाई, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाएं हर हाल में समय से उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने तीन दिनों के भीतर निरीक्षण कर प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।
41 बाढ़ चौकियां होंगी सक्रिय, कंट्रोल रूम रहेगा 24 घंटे चालू
जनपद में बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए 41 बाढ़ चौकियों की स्थापना की गई है, जहां विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की तैनाती की गई है। कलेक्ट्रेट स्थित बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24×7 सक्रिय रखने और कर्मचारियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए गए, ताकि जलस्तर की लगातार निगरानी और आमजन की शिकायतों का तत्काल निस्तारण किया जा सके।
नावों का होगा सत्यापन, नाविकों का तैयार होगा डेटाबेस
सिंचाई और राजस्व विभाग को सरकारी और निजी नावों की उपलब्धता एवं उनकी स्थिति की जांच करने के निर्देश दिए गए। साथ ही सभी नाविकों के मोबाइल नंबर और विस्तृत विवरण का डेटाबेस तैयार रखने को कहा गया, ताकि आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग को मेडिकल तैयारी पूरी करने का आदेश
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी को संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए पर्याप्त मात्रा में क्लोरीन टैबलेट, ओआरएस, एंटी-स्नेक वेनम और अन्य आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सभी सीएचसी और पीएचसी में एंटीवेनम उपलब्ध होने का प्रमाण-पत्र तीन दिनों के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों के लिए मोबाइल मेडिकल टीमों का तत्काल गठन करने के निर्देश दिए गए।
पशुओं के लिए चारा और टीकाकरण की व्यवस्था
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया गया कि बाढ़ के दौरान प्रभावित होने वाले पशुओं के लिए भूसे और चारे की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। साथ ही संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान समय से पूरा कराया जाए।
PWD और बिजली विभाग को भी दिए अहम निर्देश
लोक निर्माण विभाग (PWD) को बाढ़ संभावित क्षेत्रों के सभी संपर्क मार्गों को गड्ढामुक्त और सुगम बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई, ताकि राहत सामग्री पहुंचाने में कोई बाधा न आए।
वहीं विद्युत विभाग को निर्देश दिया गया कि जहां भी सब स्टेशन या ट्रांसफार्मर के पास जलभराव हो, वहां तत्काल बिजली आपूर्ति बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में सोलर और मूवेबल लाइट उपलब्ध कराई जाए।
बंधों, तटबंधों और नालों की होगी युद्धस्तर पर जांच
जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग को जिले के सभी तटबंधों और बंधियों का स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत और सुदृढ़ीकरण तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख नालों और ड्रेनों की सिल्ट सफाई शीघ्र पूरी करने को कहा, ताकि जलभराव की स्थिति न बने।
‘आपसी समन्वय ही सबसे बड़ी ताकत’
बैठक के दौरान डीएम चंद्र मोहन गर्ग ने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, सिंचाई, पशुपालन, बिजली और पूर्ति विभागों के बीच निरंतर समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसी विभाग की लापरवाही से राहत कार्य प्रभावित हुआ तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) राजेश कुमार, सभी तहसीलों के उपजिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, अधिशासी अभियंता सिंचाई, चंद्रप्रभा, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव, जिला आपदा विशेषज्ञ समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।