
Chandauli News: चंदौली जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का एक बड़ा स्लैब भरभराकर गिर गया, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह हादसा बनौली खुर्द गांव के पास हुआ, जहां लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से पुल का निर्माण कार्य जारी था।
हादसा कैसे हुआ
जानकारी के अनुसार, 18 मार्च की देर रात हावड़ा-गया रेल रूट पर दो पिलरों के बीच स्लैब की ढलाई का कार्य चल रहा था। इसी दौरान अचानक स्लैब ढह गया। हादसे में एक मजदूर घायल हो गया, जबकि मौके पर मौजूद दर्जनों मजदूर बाल-बाल बच गए। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई।

बिना इंजीनियर चल रहा था काम
स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के मुताबिक, निर्माण स्थल पर उस समय कोई इंजीनियर मौजूद नहीं था और काम मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा था। आरोप है कि घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके चलते यह हादसा हुआ। घटना के बाद कार्यदायी संस्था के लोग मौके से गायब हो गए।
प्रशासन और अधिकारियों की देरी
हादसे के बाद भी रेलवे और संबंधित विभागों के अधिकारी तुरंत मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। बाद में प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
सियासत गरम, सांसद धरने पर
घटना की सूचना मिलते ही सपा सांसद वीरेंद्र सिंह और विधायक प्रभुनारायण सिंह यादव मौके पर पहुंचे। सांसद ने पीडब्ल्यूडी, सेतु निगम और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए धरना शुरू कर दिया। उन्होंने पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की।
सांसद ने दावा किया कि हादसे में एक व्यक्ति की मौत हुई है, हालांकि प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है। वहीं सपा के पूर्व विधायक मनोज सिंह ‘डब्लू’ ने भी अधिकारियों पर कमीशनखोरी के आरोप लगाए।
प्रशासन का दावा बनाम विपक्ष का आरोप
एसडीएम दिव्या ओझा ने घटना का कारण खेत से पानी के रिसाव के चलते सपोर्ट पाइप के मिट्टी में धंसने को बताया। हालांकि, इस दावे को विपक्ष ने खारिज करते हुए इसे लापरवाही छिपाने की कोशिश बताया।
मामूली धाराओं में केस दर्ज
सांसद के दबाव के बाद पुलिस ने आरोपी ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, लेकिन बेहद हल्की धारा बीएनएस-125 (लापरवाही और जल्दबाजी में गुणवत्ता रहित कार्य) लगाई गई। इस धारा के तहत अधिकतम 2500 रुपये का जुर्माना या तीन महीने की सजा का प्रावधान है।
इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट में इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
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