बिहार में कैबिनेट विस्तार से पहले खींचतान तेज: जेडीयू की 16 मंत्री पदों की मांग, 7 मई को बड़ा फैसला!

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Bihar News

Bihar Cabinet Expansion: बिहार में प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार से पहले राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। जनता दल (यूनाइटेड) ने नई सरकार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के संकेत देते हुए 16 मंत्री पदों की मांग रख दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के इस बयान ने सत्ता के समीकरणों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

7 मई को हो सकता है कैबिनेट विस्तार

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार का कैबिनेट विस्तार 7 मई को किया जा सकता है। इस दौरान राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी भी संभावित बताई जा रही है, जिससे कार्यक्रम का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।

सत्ता परिवर्तन के बाद बदला समीकरण

राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव उस वक्त आया जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बनी और सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद संभाला। वह बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बने हैं।

मंत्रिमंडल में जेडीयू का सीमित प्रतिनिधित्व

फिलहाल राज्य मंत्रिमंडल में जेडीयू के केवल दो नेता—विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव—उपमुख्यमंत्री के रूप में शामिल हैं। ऐसे में पार्टी अब विस्तार के दौरान अपने प्रभाव को मजबूत करने के लिए अधिक मंत्री पद चाहती है।

संवैधानिक सीमा भी बनेगी अहम फैक्टर

संविधान के अनुसार किसी भी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। बिहार विधानसभा में 243 सदस्य हैं, इसलिए अधिकतम 30 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं। ऐसे में सभी सहयोगी दलों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।

एनडीए में कई दल, बढ़ी प्रतिस्पर्धा

बिहार में एनडीए गठबंधन में जेडीयू और भाजपा के अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा भी शामिल हैं। ऐसे में हर दल मंत्रिमंडल में बेहतर हिस्सेदारी चाहता है, जिससे खींचतान तेज हो गई है।

निशांत कुमार को लेकर भी चर्चा तेज

निशांत कुमार के संभावित मंत्री बनने को लेकर भी सवाल उठे, लेकिन उमेश कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उन्होंने संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देने का निर्णय लिया है। हाल ही में उनकी “सद्भाव यात्रा” को उनके सक्रिय राजनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।


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