
NEET UG Paper Leak: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। अब जांच में ऐसे अहम सुराग सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली को उजागर कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, लीक हुआ प्रश्नपत्र यश यादव नाम के युवक के जरिए राजस्थान तक पहुंचा था। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी कड़ी से पेपर सीकर समेत कई कोचिंग संस्थानों तक फैलाया गया।
मामले में सामने आए खुलासों के बाद जांच अब केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं रही, बल्कि एजेंसियां इस पूरे रैकेट के आर्थिक नेटवर्क यानी मनी ट्रेल को भी खंगाल रही हैं।

हार्डकॉपी स्कैन कर बनाई गई थी PDF
जांच एजेंसियों की पड़ताल में सामने आया है कि विकास बिवाल के पिता दिनेश बिवाल ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र की हार्डकॉपी को स्कैन कर उसकी PDF फाइल तैयार की थी। आरोप है कि इसके बाद यह डिजिटल कॉपी राजस्थान के कई छात्रों तक पहुंचाई गई।
सूत्रों के अनुसार, सीकर के कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को यह प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले उपलब्ध कराया गया था। एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था।
छात्रों से वसूले गए लाखों रुपये
पूछताछ में कई छात्रों ने खुलासा किया है कि उनसे प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के बदले 2 लाख से 5 लाख रुपये तक वसूले गए थे। माना जा रहा है कि यह रकम अलग-अलग माध्यमों से नेटवर्क के सदस्यों तक पहुंचाई गई।
हालांकि मामले में सामने आए शुभम नाम के आरोपी ने खुद को इस रैकेट का मास्टरमाइंड मानने से इनकार किया है। इसके बावजूद एजेंसियां उससे लगातार पूछताछ कर रही हैं और अन्य आरोपियों के बयान से कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
खुद परीक्षा पास नहीं कर पाया यश यादव
जांच में सामने आया है कि यश यादव, जो इस नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है, खुद NEET परीक्षा पास नहीं कर पाया था। वह वर्तमान में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिकल साइंसेज (BAMS) का छात्र बताया जा रहा है।
एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्तर पर लीक हुआ और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे। जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
CBI की जांच अब मनी ट्रेल पर केंद्रित
CBI ने मामले में कई कोचिंग संस्थानों के मालिकों और स्टाफ से भी पूछताछ की है। इसके अलावा गिरफ्तार आरोपियों और छात्रों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अब जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस इस पूरे खेल में पैसों के लेन-देन पर है।
जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि छात्रों से वसूली गई रकम किन खातों तक पहुंची और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग आर्थिक रूप से लाभान्वित हुए। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।