
UP Panchayat Election 2026: लखनऊ में सोमवार को हुई योगी कैबिनेट की अहम बैठक में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए “समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन को मंजूरी दे दी। यह आयोग पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर सर्वे और अध्ययन करेगा तथा अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।
सरकार का कहना है कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है, ताकि पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्गों को आबादी के अनुपात में आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

क्यों बनाया जाएगा समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग?
उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक, पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए थे। इन्हीं आदेशों का पालन करने के लिए राज्य सरकार अब “उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” का गठन करेगी।
यह आयोग राज्य में पिछड़े वर्गों की सामाजिक और जनसंख्या स्थिति का अध्ययन करेगा। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि किस पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत में OBC आरक्षण कितना होगा।
सरकार का मानना है कि पंचायत चुनाव में आरक्षण प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए आयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
पंचायत चुनाव में कैसे तय होगा आरक्षण?
प्रदेश में पंचायत चुनावों के लिए पहले से उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 और उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम 1961 लागू हैं। इन्हीं के तहत पंचायतों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों को आरक्षण दिया जाता है।
नई व्यवस्था के तहत आयोग पंचायत स्तर पर पिछड़े वर्गों की स्थिति का अध्ययन करेगा और उसके बाद पंचायतों में आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा।
सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल सीटों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। यदि OBC आबादी के ताजा आंकड़े उपलब्ध नहीं हुए, तो आयोग सर्वेक्षण कर डेटा तैयार करेगा।
आयोग में कौन-कौन होंगे सदस्य?
सरकार द्वारा गठित किए जाने वाले इस आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे। इनमें एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज को आयोग का अध्यक्ष बनाया जाएगा। बाकी सदस्य ऐसे लोगों को बनाया जाएगा जिन्हें पिछड़े वर्गों से जुड़े मामलों का अनुभव और जानकारी हो।
आयोग का कार्यकाल सामान्य तौर पर छह महीने का होगा। इस दौरान आयोग पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा।
पंचायत चुनाव 2026 से पहले क्यों अहम है यह फैसला?
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में OBC आरक्षण को लेकर किसी कानूनी विवाद से बचने के लिए सरकार ने पहले ही आयोग बनाने का फैसला लिया है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, पंचायत चुनावों में पिछड़ा वर्ग निर्णायक भूमिका निभाता है। इसलिए आयोग की रिपोर्ट आने के बाद पंचायत चुनाव की आरक्षण सूची और राजनीतिक समीकरण दोनों प्रभावित हो सकते हैं।