
PM Vishwakarma Yojana 2026: केंद्र सरकार द्वारा सितंबर 2023 में शुरू की गई प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के जरिए पारंपरिक कारीगरों और कामगारों को आर्थिक और कौशल विकास से जुड़ी सहायता दी जा रही है। देशभर में करोड़ों लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं। हालांकि योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने पात्रता और व्यवसायों की एक तय सूची बनाई है। ऐसे में आवेदन करने से पहले यह जानना जरूरी है कि कौन लोग इस योजना के लिए पात्र हैं और आवेदन की प्रक्रिया क्या है।
क्या है पीएम विश्वकर्मा योजना?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य पारंपरिक हुनर से जुड़े कारीगरों और श्रमिकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि वे अपने काम को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकें।

सरकार का लक्ष्य छोटे कारीगरों और पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े लोगों को संगठित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
योजना में आवेदन कैसे करें?
पीएम विश्वकर्मा योजना में आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया
सबसे पहले योजना की आधिकारिक वेबसाइट
PM Vishwakarma Yojana Official Website पर जाएं।
वेबसाइट के लॉगिन सेक्शन में जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।
जरूरी दस्तावेज और जानकारी भरने के बाद आवेदन सबमिट किया जा सकता है।
ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया
ऑफलाइन आवेदन के लिए आवेदक को अपने नजदीकी CSC सेंटर जाना होगा।
वहां पात्रता की जांच और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है।
सभी जानकारी सही पाए जाने पर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है।
कौन लोग योजना के लिए पात्र हैं?
सरकार ने योजना के लिए कुछ पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया है। केवल उन्हीं क्षेत्रों से जुड़े लोग इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
इन व्यवसायों से जुड़े लोग आवेदन कर सकते हैं—
मूर्तिकार
धोबी
दर्जी
लोहार
ताला बनाने वाले कारीगर
फिशिंग नेट निर्माता
हथौड़ा और टूलकिट निर्माता
मालाकार
राजमिस्त्री
टोकरी, चटाई और झाड़ू बनाने वाले
गुड़िया और खिलौना निर्माता
नाव निर्माता
मोची और जूता बनाने वाले कारीगर
नाई
अस्त्रकार
पत्थर तोड़ने वाले
पत्थर तराशने वाले
आवेदन से पहले क्या ध्यान रखें?
योजना में आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज सही होने चाहिए। इसके अलावा आवेदक का व्यवसाय पात्रता सूची में शामिल होना अनिवार्य है। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद दस्तावेजों की जांच की जाती है, जिसके आधार पर लाभार्थियों का चयन किया जाता है।
सरकार का मानना है कि इस योजना के जरिए पारंपरिक कौशल और कारीगरों को नई पहचान मिलेगी और छोटे कामगारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।