योगी सरकार का बड़ा फैसला: पंचायत चुनाव के लिए OBC आयोग गठित,रिटायर्ड जज राम औतार सिंह को मिली बड़ी जिम्मेदारी

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UP Panchayat Election

UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने स्थानीय निकायों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय करने के लिए राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC आयोग) का गठन कर दिया है। सरकार ने रिटायर्ड जज राम औतार सिंह को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। माना जा रहा है कि आयोग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पंचायत चुनाव कराए जाएंगे, जिससे चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद होने की संभावना बढ़ गई है।

छह महीने में रिपोर्ट देगा आयोग

सरकार की ओर से गठित यह आयोग अगले छह महीने तक कार्य करेगा। सूत्रों के मुताबिक आयोग नवंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत सीटों पर ओबीसी आरक्षण का अंतिम खाका तय किया जाएगा।

आयोग में दो रिटायर्ड अपर जिला जज और दो पूर्व आईएएस अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है। इनमें रिटायर्ड अपर जिला जज बृजेश कुमार और संतोष विश्वकर्मा शामिल हैं। वहीं पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद चौरसिया और एसपी सिंह को भी आयोग में जगह दी गई है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुआ गठन

पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा था। 4 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि सुप्रीम कोर्ट की तय ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया का पालन करते हुए आयोग का गठन किया जाए। इसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया।

राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने में लंबा समय लग सकता है, जिसके कारण पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव 2027 के बाद कराए जा सकते हैं।

पहले भी अहम भूमिका निभा चुके हैं राम औतार सिंह

आयोग के अध्यक्ष बनाए गए राम औतार सिंह इससे पहले 2022 में नगर निकाय चुनाव के लिए गठित ओबीसी आयोग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उस आयोग ने तय समय के भीतर रिपोर्ट सौंपी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार करते हुए निकाय चुनाव कराने की अनुमति दी थी।

राम औतार सिंह मूल रूप से बिजनौर के रहने वाले हैं। उन्होंने 1976 में पीसीएस न्यायिक सेवा से अपने करियर की शुरुआत की थी। बाद में उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नति मिली और वर्ष 2008 से 2011 तक वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज भी रहे।

आखिर क्यों जरूरी है OBC आयोग?

सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण लागू करने से पहले राज्यों के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ अनिवार्य किया है। इसके तहत सरकार को पहले आयोग बनाकर पिछड़े वर्ग की वास्तविक स्थिति का अध्ययन कराना होता है।

आयोग पंचायत और ब्लॉक स्तर पर ओबीसी आबादी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण की जरूरत का आकलन करेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि कौन-सी सीटें पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित रहेंगी।

50% आरक्षण सीमा का भी होगा पालन

आयोग यह भी सुनिश्चित करेगा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी आरक्षण मिलाकर कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा से अधिक न हो। इसके अलावा पंचायत सीटों के आरक्षण का अनुपात भी ओबीसी आबादी के हिसाब से तय किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि आयोग की रिपोर्ट के बिना सीधे आरक्षण लागू किया गया तो मामला दोबारा अदालत में फंस सकता है और चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

पंचायत चुनाव पर अब सबकी नजर

प्रदेश में करीब ढाई हजार से अधिक पंचायतों और हजारों ग्राम पंचायत सीटों पर आरक्षण का गणित इस आयोग की रिपोर्ट से तय होगा। ऐसे में अब राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों की नजर आयोग की सिफारिशों पर टिक गई है।


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