
Chandauli News: चंदौली में मत्स्य संपदा के संरक्षण और प्रजनन काल के दौरान मछलियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। जिलाधिकारी एवं जिला मजिस्ट्रेट चंद्र मोहन गर्ग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित अवधि तक प्रजननशील मछलियों का शिकार, बिक्री या परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उत्तर प्रदेश मत्स्य अधिनियम, 1948 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पूरे जिले के जलाशयों और नदियों पर लागू रहेगा आदेश
जिलाधिकारी ने बताया कि यह आदेश चंदौली जिले की सीमा में आने वाले सभी सरकारी जलाशयों, नदियों और प्राकृतिक जलधाराओं पर तत्काल प्रभाव से लागू रहेगा। केवल वे जलाशय इससे बाहर होंगे जिन्हें विधिवत निजी या धार्मिक घोषित किया गया है।
प्रशासन का उद्देश्य मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन चक्र को सुरक्षित रखना और जलाशयों में मत्स्य संसाधनों को संरक्षित करना है।
प्रजननशील मछलियों के शिकार पर पूरी तरह रोक
जारी आदेश के अनुसार 15 जून 2026 से 30 जुलाई 2026 तक प्रजननशील मछलियों को पकड़ना, मारना या बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा 15 जुलाई से 30 सितंबर 2026 तक 2 से 10 इंच आकार की मत्स्य जीरा और अंगुलिका श्रेणी की मछलियों को पकड़ने और बेचने पर भी रोक रहेगी।
हालांकि, जिन लोगों के पास मत्स्य विभाग द्वारा जारी वैध लाइसेंस होगा, वे निर्धारित नियमों के अनुसार ही कार्य कर सकेंगे।
विस्फोटक और जहरीले रसायनों के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति विस्फोटक सामग्री, जहरीले रसायन या कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले विषैले पदार्थों से मछलियों का शिकार नहीं कर सकेगा। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
31 अगस्त तक कई जलाशयों में रहेगा मत्स्य आखेट बंद
शासन के निर्देशों के अनुसार 1 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक विभिन्न श्रेणी के जलाशयों में मत्स्य आखेट पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह कदम मछलियों के संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अवरोध लगाकर मछली पकड़ने वालों पर भी कार्रवाई
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी व्यक्ति नदियों या जलधाराओं के प्राकृतिक बहाव को रोकने के लिए अवरोध नहीं लगाएगा। यदि कोई ऐसा करते हुए मत्स्य जीरा, अंगुलिका या अन्य मछलियां पकड़ता पाया गया तो अवरोधक सामग्री, पकड़ी गई मछलियां और अन्य उपकरण मौके पर ही जब्त कर लिए जाएंगे।
उल्लंघन करने वालों पर दर्ज होगा मुकदमा
जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने कहा कि आदेशों का उल्लंघन उत्तर प्रदेश मत्स्य अधिनियम, 1948 के अंतर्गत दंडनीय अपराध माना जाएगा। मत्स्य विभाग और प्रशासनिक टीमें नियमित रूप से जलाशयों और नदियों की निगरानी करेंगी। किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि मिलने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने सभी मछुआरों और आम नागरिकों से अपील की है कि मत्स्य संरक्षण अभियान में प्रशासन का सहयोग करें, ताकि भविष्य में मत्स्य उत्पादन बढ़े और प्राकृतिक जल संसाधनों का संतुलन बना रहे।