अब नहीं चलेगा मनरेगा! आज से लागू हुआ VB G-RAM-G कानून, जानिए क्या-क्या बदल गया

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VB G-RAM-G law

VB G-RAM-G Act: देश की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2026 से ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ (VB G-RAM-G) लागू कर दिया है। सरकार के अनुसार यह नई व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आधुनिक आधारभूत ढांचा तैयार करने, जल संरक्षण, कृषि विकास और आजीविका को मजबूत करने पर भी समान रूप से काम करेगी।

अब हर साल 125 दिन रोजगार की गारंटी

नए कानून के तहत अकुशल श्रम करने के इच्छुक ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को अब प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी। इससे पहले ग्रामीण रोजगार योजना के तहत यह सीमा 100 दिन निर्धारित थी। सरकार का दावा है कि रोजगार के दिनों में वृद्धि से ग्रामीण परिवारों की आय और आर्थिक सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी।

चार बड़े क्षेत्रों पर रहेगा पूरा फोकस

VB G-RAM-G कानून में विकास कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है।

पहला, जल सुरक्षा, जिसके अंतर्गत जल संरक्षण, सिंचाई परियोजनाएं, भूजल पुनर्भरण, तालाबों का पुनर्जीवन और वनीकरण जैसे कार्य कराए जाएंगे।

दूसरा, ग्रामीण आधारभूत ढांचा, जिसमें सड़क, स्कूल, सार्वजनिक भवन, स्वच्छता, सौर ऊर्जा और ग्रामीण आवास से जुड़े विकास कार्य शामिल होंगे।

तीसरा, आजीविका संवर्धन, जिसके तहत कृषि, मत्स्य पालन, ग्रामीण भंडारण, बाजार सुविधाओं और कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

चौथा, आपदा प्रबंधन, जिसमें बाढ़ सुरक्षा, तटबंध निर्माण, पुनर्वास, राहत केंद्र और जंगलों में आग रोकने जैसी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

मनरेगा से कैसे अलग है नया कानून?

सरकार के मुताबिक नई व्यवस्था कई मायनों में पहले की रोजगार योजना से अलग होगी।

सबसे बड़ा बदलाव रोजगार की अवधि को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करना है। इसके अलावा सभी विकास परियोजनाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक से जोड़ा जाएगा। सामान्य राज्यों में केंद्र और राज्य के बीच खर्च का अनुपात 60:40, जबकि हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों में 90:10 रहेगा।

राज्य सरकारों को बुवाई और कटाई जैसे कृषि सीजन के दौरान अधिकतम 60 दिनों तक कार्य स्थगित करने का अधिकार भी दिया गया है। साथ ही योजनाओं का फोकस केवल मजदूरी आधारित कार्यों की बजाय टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर रहेगा।

तकनीक से होगी हर काम की निगरानी

नई व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाएगा।

मजदूरों का बायोमेट्रिक सत्यापन, जीपीएस आधारित कार्य निगरानी, मोबाइल ऐप से रियल-टाइम रिपोर्टिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित विश्लेषण, सोशल ऑडिट और सार्वजनिक डिजिटल डैशबोर्ड जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे फर्जी भुगतान, डुप्लीकेट जॉब कार्ड और भ्रष्टाचार जैसी शिकायतों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

ग्राम पंचायतों को मिली नई जिम्मेदारी

अब प्रत्येक ग्राम पंचायत ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ तैयार करेगी। इन योजनाओं को राज्य सरकार और केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर अंतिम रूप दिया जाएगा। योजनाओं को पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म और जीपीएस तकनीक से जोड़ा जाएगा ताकि विकास कार्यों की योजना और निगरानी अधिक प्रभावी हो सके।

राज्यों के लिए भी नई व्यवस्था

नए कानून में राज्यों को Normative Allocation System के तहत वित्तीय संसाधनों का वितरण करना होगा। इसके माध्यम से जिलों और ग्राम पंचायतों को उनकी स्थानीय जरूरतों के आधार पर बजट उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

सरकार ने बदलाव की क्या वजह बताई?

सरकार का कहना है कि पूर्व की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था के दौरान कई राज्यों में फर्जी जॉब कार्ड, कागजों पर कार्य दिखाकर भुगतान, मशीनों के अवैध उपयोग और धन के दुरुपयोग जैसी शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं कमियों को दूर करने और रोजगार व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से VB G-RAM-G कानून लागू किया गया है।

सरकार का दावा है कि यह नई व्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


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