
Chandauli News: विंध्य लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर चंदौली के किसानों का विरोध अब संसद तक पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी के चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह ने लोकसभा में नियम-377 के तहत यह मुद्दा उठाते हुए किसानों की उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण और परियोजना की आवश्यकता पर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि विकास का विरोध नहीं है, लेकिन किसानों के हितों से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
लोकसभा में उठाया किसानों की जमीन का मुद्दा
लोकसभा में बोलते हुए सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रस्तावित विंध्य लिंक एक्सप्रेसवे चंदौली के 52 गांवों से होकर गुजरने वाला है। इन गांवों के किसान लंबे समय से परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण बाजार मूल्य से कम दरों पर किया जा रहा है, जिससे किसानों के साथ अन्याय हो रहा है।
उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन उनकी सबसे बड़ी पूंजी और आजीविका का आधार है। ऐसे में अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और उचित मुआवजे के साथ होनी चाहिए।
‘चार किलोमीटर के दायरे में दो एक्सप्रेसवे क्यों?’
सपा सांसद ने सरकार से यह भी पूछा कि जब पहले से एक एक्सप्रेसवे मौजूद है, तो महज चार किलोमीटर के दायरे में दूसरा एक्सप्रेसवे बनाने की आवश्यकता क्या है। उन्होंने इस परियोजना की उपयोगिता और योजना के औचित्य पर स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा कि विकास योजनाओं में किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
‘विकास के खिलाफ नहीं, किसानों के साथ हूं’
वीरेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी विकास परियोजना के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना था कि यदि विकास के नाम पर किसानों के अधिकारों का हनन होगा, तो वह संसद से लेकर सड़क तक किसानों की आवाज बुलंद करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी किसी भी नीति से बचना चाहिए, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़े या उनकी उपजाऊ जमीन कम मूल्य पर अधिग्रहित की जाए।
52 गांवों के किसान कर रहे विरोध, धरना जारी
विंध्य लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना से प्रभावित चंदौली के 52 गांवों के किसान लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विकास भवन के समीप किसान अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर पुनर्विचार तथा उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
संसद से सड़क तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान
सपा सांसद ने कहा कि किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह जारी रहेगा। उन्होंने दोहराया कि सरकार यदि किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज करती है, तो वह लगातार इस मुद्दे को उठाते रहेंगे और प्रभावित किसानों के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।