15% कमीशन पर बेचते थे बैंक खाते, वाराणसी में अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का खुलासा, 5 शातिर ठग गिरफ्तार

Spread the love & Share it

Varanasi News

Varanasi News: पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी की साइबर क्राइम टीम ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए पांच शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस गिरोह से जुड़े बैंक खातों के जरिए देशभर में करीब 18 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े लेनदेन हुए हैं। आरोपी लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे और ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराने का काम करते थे। पुलिस ने गिरोह के कब्जे से बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज, एटीएम कार्ड और दो लग्जरी वाहन भी बरामद किए हैं।

कमिश्नरेट पुलिस की कार्रवाई में खुला हाईटेक साइबर नेटवर्क

पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के निर्देशन में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस उपायुक्त (अपराध) नीतू कादयान, अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) नृपेन्द्र और सहायक पुलिस आयुक्त (अपराध) विनय द्विवेदी की निगरानी में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की। जांच के दौरान पता चला कि गिरोह संगठित तरीके से देशभर के साइबर अपराधियों के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराता था।

गरीब लोगों को लालच देकर खुलवाते थे बैंक खाते

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम से विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाते थे। इसके बाद खाताधारकों से एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग आईडी और पासवर्ड लेकर बैंक खाते का पूरा नियंत्रण अपने पास कर लेते थे।

इन खातों को बाद में देश और विदेश में सक्रिय साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया जाता था। विदेशी ठगों से मिली ट्रांजेक्शन APK फाइल को लिंक मोबाइल नंबर वाले फोन में इंस्टॉल कर बैंक खातों तक रिमोट एक्सेस हासिल किया जाता था। इसके जरिए साइबर ठगी से मिली रकम कई खातों में घुमाई जाती थी ताकि उसकी ट्रैकिंग मुश्किल हो सके।

ठगी की रकम पर मिलता था 8 से 15 प्रतिशत कमीशन

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि साइबर ठगी से आने वाली रकम पर उन्हें 8 से 15 प्रतिशत तक कमीशन मिलता था। इसी अवैध कमाई से उन्होंने महिंद्रा थार और हुंडई i20 जैसी गाड़ियां खरीदी थीं। इतना ही नहीं, इन वाहनों की ईएमआई भी साइबर ठगी से मिली रकम से भरी जा रही थी।

पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 15 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 3 आईफोन, 43 एटीएम कार्ड, 12 पासबुक, 10 चेकबुक, 12 सिम कार्ड, 11 क्यूआर कोड, एक लैपटॉप, एक डायरी और 12,060 रुपये नकद बरामद किए। इसके अलावा महिंद्रा थार (UP 65 FV 0326) और हुंडई i20 (UP 65 EA 2803) कार भी जब्त की गई।

ये हैं गिरफ्तार आरोपी

गिरफ्तार आरोपियों में आदर्श चौबे निवासी रामगढ़ (चुनार, मिर्जापुर), आशीष यादव निवासी आजमगढ़, सुजल सिंह निवासी मुजफ्फरनगर, पियूष सिंह निवासी मऊ और युवराज वर्मा निवासी नरिया (लंका, वाराणसी) शामिल हैं। इनमें से कई आरोपी वर्तमान में वाराणसी के अलग-अलग इलाकों में रह रहे थे।

डिजिटल साक्ष्यों की होगी वैज्ञानिक जांच

पुलिस के मुताबिक आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों से बैंक खातों की जानकारी, साइबर ट्रांजेक्शन, टेलीग्राम चैट और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। अब इन सभी का फॉरेंसिक विश्लेषण कराया जा रहा है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और साइबर नेटवर्क तक पहुंचा जा सके।

इस मामले में साइबर क्राइम थाना वाराणसी में मु0अ0सं0 35/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 61(2), 112 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C और 66D के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस ने लोगों से की यह अपील

साइबर क्राइम पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी न दें। किसी भी संदिग्ध APK फाइल या अनजान एप्लीकेशन को मोबाइल में इंस्टॉल करने से बचें। बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले मिलने वाले कमीशन के लालच में न आएं। यदि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार हों तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें या cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।


Spread the love & Share it

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *