विंध्य एक्सप्रेसवे पर किसानों का बड़ा ऐलान! सर्वे टीम को गांव से लौटाया, बोले- ‘जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे’

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Chandauli News

Chandauli News: विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना के विरोध में किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को 18वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान सकलडीहा क्षेत्र के पचोखर गांव में किसानों ने सर्वे के लिए पहुंची टीम का विरोध करते हुए उसे बिना काम किए वापस लौटा दिया। किसानों ने स्पष्ट कहा कि जब तक प्रशासन और यूपीडा (UPIDA) के साथ औपचारिक वार्ता नहीं होगी, तब तक भूमि अधिग्रहण से जुड़ी किसी भी कार्रवाई की अनुमति नहीं दी जाएगी।


‘वार्ता से पहले नहीं होगा सर्वे’

संयुक्त किसान मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष सतीश सिंह चौहान ने बताया कि पचोखर गांव में किसानों ने एकजुट होकर सर्वे टीम का विरोध किया। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि बिना वार्ता और बिना विधिक प्रक्रिया पूरी किए किसी भी प्रकार का सर्वे या भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा।

किसानों का कहना है कि पहले उनकी आपत्तियां सुनी जाएं और उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू हो।


विरोध के बाद SDM ने लगाई चौपाल

सर्वे टीम के लौटने के बाद उपजिलाधिकारी राजीव मोहन सक्सेना ने पचोखर में चौपाल आयोजित कर किसानों से बातचीत की। इस बैठक में पचोखर, शिवनाथपुर और चंदाइत गांव के किसान शामिल हुए।

बैठक में किसानों ने प्रशासन के सामने दो प्रमुख मांगें रखीं—

  • यूपीडा, जिला प्रशासन और किसानों के बीच औपचारिक वार्ता कराई जाए।
  • वार्ता पूरी होने तक भूमि अधिग्रहण से जुड़ी सभी कार्रवाई तत्काल स्थगित की जाए।

किसानों ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया है। साथ ही स्पीड पोस्ट के जरिए भी मांग पत्र भेजा गया है।


‘किसान विकास के विरोधी नहीं, लेकिन न्याय जरूरी’

भाकियू नेता सतीश सिंह चौहान ने कहा कि किसान किसी भी विकास परियोजना के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत केवल किसानों को नहीं चुकानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि परियोजना का रोडमैप तैयार करते समय प्रभावित किसानों की समस्याओं को भी शामिल किया जाता तो आज विरोध की स्थिति नहीं बनती।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परियोजनाओं के लिए रोडमैप तो तैयार कर लेती है, लेकिन जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित हो रही है, उनके पुनर्वास और भविष्य की कोई स्पष्ट योजना नहीं बनाती।


‘नोटिफिकेशन के बिना अधिग्रहण असंवैधानिक’

किसानों का आरोप है कि अब तक प्रभावित ग्रामीणों को भूमि अधिग्रहण का कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन नहीं दिया गया है। इसके बावजूद सर्वे और सीमांकन के लिए टीमें गांवों में भेजी जा रही हैं।

किसानों का कहना है कि यह प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं है। पहले अधिसूचना जारी की जानी चाहिए ताकि प्रभावित किसान अपनी आपत्तियां और सुझाव संबंधित मंच पर रख सकें।


58 गांव प्रभावित, आंदोलन जारी रहेगा

संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना से करीब 58 गांवों के किसान प्रभावित होंगे। किसानों ने निर्णय लिया है कि जब तक प्रशासन वार्ता नहीं करता और उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक भूमि अधिग्रहण से जुड़ी कोई भी कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी।

धरनास्थल से किसानों ने एक स्वर में कहा कि “जान दे देंगे, लेकिन अपनी जमीन नहीं देंगे।”


धरने में बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद

धरना-प्रदर्शन में संयुक्त किसान मोर्चा और विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारी व ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रमुख रूप से सतीश सिंह चौहान, डॉ. राजीव मौर्य, श्रवण मौर्य, अखिल भारतीय किसान महासभा के रामनारायण यादव, संजय सिंह, प्रभाकर सिंह, प्रकाश पांडेय, मंगल सिंह, रणजीत सिंह, बहादुर यादव, श्याम, कार्तिक चौहान और भगत चौहान सहित अनेक किसान उपस्थित रहे।


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