
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले फेज के नामांकन के साथ ही नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू (JDU) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कई दिग्गज नेता तेजस्वी यादव की राजद (RJD) में शामिल होने जा रहे हैं। इनमें सबसे चर्चित नाम पूर्णिया के पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा का है, जो अब लालटेन थामने की तैयारी में हैं।
सीमांचल में जेडीयू को बड़ा झटका
संतोष कुशवाहा सीमांचल के प्रभावशाली कुशवाहा (कोइरी) नेता माने जाते हैं। वे पूर्णिया, किशनगंज और अररिया जैसे जिलों में मजबूत पकड़ रखते हैं। दो बार के सांसद रहे संतोष कुशवाहा के पार्टी छोड़ने से सीमांचल में जेडीयू का समीकरण बिगड़ सकता है, जबकि तेजस्वी यादव को इसका सीधा फायदा मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, संतोष कुशवाहा पूर्णिया जिले की धमदाहा विधानसभा सीट से मंत्री लेसी सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।
पिता सांसद, बेटा अब लालटेन में
जेडीयू सांसद गिरधारी यादव के बेटे चाणक्य प्रकाश भी राजद में शामिल हो रहे हैं। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़े चाणक्य बेलहर विधानसभा सीट से उम्मीदवार हो सकते हैं। इसके अलावा, जहानाबाद के पूर्व सांसद जगदीश शर्मा के बेटे और पूर्व विधायक राहुल शर्मा भी राजद का दामन थामने जा रहे हैं। राजद राहुल के जरिये मगध क्षेत्र के भूमिहार वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
तेजस्वी की “A टू Z पॉलिटिक्स” रणनीति
तेजस्वी यादव अब पारंपरिक “MY समीकरण” (मुस्लिम-यादव) से आगे बढ़कर “A टू Z पॉलिटिक्स” पर फोकस कर रहे हैं। राजद इस बार लगभग 20 सवर्ण उम्मीदवारों को टिकट देने की तैयारी में है, जिसमें से 8 से 10 भूमिहार चेहरे हो सकते हैं। पार्टी का लक्ष्य है — हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देकर सत्ता में वापसी की मजबूत संभावना बनाना।
कुशवाहा वोट बैंक पर भी नजर
राजद की रणनीति में कुशवाहा (कोइरी) समाज भी अहम हिस्सा है। लोकसभा चुनाव में 7 कुशवाहा प्रत्याशी उतारने के बाद, इस बार तेजस्वी 13 कुशवाहा उम्मीदवारों को विधानसभा टिकट दे सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, तेजस्वी इस कदम से नीतीश कुमार के पारंपरिक लव-कुश वोट बैंक में सेंध लगाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
राजनीतिक समीकरण में बड़ा फेरबदल
इन बड़े नेताओं के राजद में शामिल होने से बिहार के कई इलाकों — सीमांचल, मगध और सहरसा बेल्ट — में चुनावी हवा का रुख बदल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दलबदल राजद के लिए नैरेटिव जीत और जेडीयू के लिए संगठनात्मक झटका साबित हो सकता है।
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