ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने UPPCL चेयरमैन को भेजा सख्त पत्र, 10% सरचार्ज पर मांगा जवाब

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FPPAS Surcharge

FPPAS Surcharge: उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन आशीष गोयल को सख्त पत्र लिखकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब मांगा है। खासतौर पर जून 2026 के बिजली बिलों में लगाए गए 10 प्रतिशत FPPAS (Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge) को लेकर मंत्री ने गहरी नाराजगी जताई है।

ऊर्जा मंत्री का कहना है कि करोड़ों उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाला इतना बड़ा फैसला उनकी जानकारी और अनुमति के बिना लिया गया, जिससे सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा है और जनता के बीच गलत संदेश गया है।

‘मीडिया से पता चलते हैं विभाग के फैसले’

ऊर्जा मंत्री ने अपने पत्र में विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी उन्हें सीधे विभाग से नहीं बल्कि मीडिया और टीवी चैनलों के जरिए मिलती है।

मंत्री ने इसे प्रशासनिक समन्वय की बड़ी कमी बताते हुए पूछा कि आखिर विभाग के महत्वपूर्ण निर्णयों में मंत्री को विश्वास में क्यों नहीं लिया जाता।

10% FPPAS सरचार्ज पर उठे सवाल

पत्र में मंत्री ने जून 2026 के बिजली बिलों में जोड़े गए 10 प्रतिशत FPPAS सरचार्ज का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले सीधे जनता की जेब पर असर डालते हैं, इसलिए इन्हें पूरी पारदर्शिता और निर्धारित प्रक्रिया के तहत लागू किया जाना चाहिए।

ऊर्जा मंत्री ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं से जुड़े ऐसे मामलों में सरकार और विभागीय नेतृत्व के बीच बेहतर संवाद आवश्यक है।

UPPCL मुख्यालय की कार्यशैली पर भी नाराजगी

मंत्री ने यूपीपीसीएल मुख्यालय की कार्यप्रणाली पर भी असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने चेयरमैन की उपस्थिति, विभागीय निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए हैं।

पत्र में कहा गया है कि बिजली संकट जैसे महत्वपूर्ण समय में विभागीय नेतृत्व को अधिक सक्रिय और जवाबदेह होना चाहिए, ताकि जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकें।

अनुभवी अधिकारियों को हटाने पर भी सवाल

ऊर्जा मंत्री ने विभाग में अनुभवी अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाए जाने तथा उनके स्थान पर नए अधिकारियों की तैनाती को लेकर भी चिंता जताई है।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अनुभव और कार्यकुशलता को नजरअंदाज करने से बिजली व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे मामलों की समीक्षा आवश्यक है।

संविदा कर्मियों की छंटनी पर मांगी रिपोर्ट

पत्र में संविदा कर्मचारियों को हटाने के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया है। मंत्री ने कहा कि उन्हें शिकायतें मिली हैं कि कुछ स्थानों पर संविदा कर्मियों को जाति और धर्म के आधार पर हटाए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए पूछा है कि आखिर किन मानकों के आधार पर यह कार्रवाई की गई।

राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज

ऊर्जा मंत्री और UPPCL चेयरमैन के बीच बढ़ते मतभेद अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं। विपक्ष पहले से बिजली संकट और बढ़े हुए बिलों को लेकर सरकार पर हमलावर है।

ऐसे में विभाग के भीतर सामने आए इस विवाद ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

आगे क्या?

ऊर्जा मंत्री के पत्र के बाद अब सभी की नजर UPPCL चेयरमैन की प्रतिक्रिया और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर उच्च स्तर पर समीक्षा हो सकती है।

फिलहाल, बिजली बिलों पर अतिरिक्त सरचार्ज और विभागीय कार्यशैली को लेकर उठे सवालों ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों में नई बहस छेड़ दी है।


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