
Chandauli News: कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली में मंगलवार को वन महोत्सव और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज (अयोध्या) के कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने दीप जलाकर और पौधा लगाकर की। इस दौरान उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने और गुणवत्तापूर्ण बीज खुद तैयार करने की अपील की।
कुलपति ने कहा कि अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से अपने खेतों के लिए खुद बीज तैयार करेंगे तो खेती की लागत कम होगी, अच्छी गुणवत्ता के बीज आसानी से मिलेंगे और उत्पादन के साथ उनकी आय भी बढ़ेगी। उन्होंने किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और सुझाव भी लिए। साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से गांव स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र की अलग-अलग इकाइयों का निरीक्षण किया। प्राकृतिक खेती से जुड़े कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत, ब्रह्मास्त्र और अग्नास्त्र जैसे जैविक उत्पादों के इस्तेमाल को बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके अलावा बीज उत्पादन कार्यक्रमों का विस्तार करने और फलदार व वानिकी पौधों की नर्सरी को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया, ताकि किसानों को बेहतर गुणवत्ता के पौधे उपलब्ध कराए जा सकें।
विश्वविद्यालय के प्रसार निदेशक डॉ. राम बटुक सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय के तहत प्रदेश में संचालित 25 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक कृषि तकनीक और पौध उपलब्ध कराने का काम कर रहे हैं। उन्होंने किसानों से इन सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।
कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने केंद्र की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों के लिए नियमित प्रशिक्षण, प्राकृतिक खेती, उन्नत बीज उत्पादन और नई कृषि तकनीकों के प्रदर्शन कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं। उनका उद्देश्य किसानों की लागत घटाना और आय बढ़ाना है।
कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी, उपनिदेशक कृषि, जिला उद्यान अधिकारी, इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक के अलावा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अभयदीप गौतम, डॉ. अमित सिंह, डॉ. प्रतीक सिंह और मनीष सिंह मौजूद रहे। वहीं केंद्र के कर्मचारियों और 105 प्रगतिशील किसानों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. चंदन सिंह ने किया।