
Chandauli News: खरीफ सीजन में धान की रोपाई और अन्य फसलों की बुवाई के बीच कृषि विभाग ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। बदलते मौसम और बढ़ते कीट-रोगों के खतरे को देखते हुए जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने और वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन अपनाने की अपील की है। विभाग का कहना है कि समय रहते सही उपचार करने से फसल सुरक्षित रहेगी और उत्पादन लागत भी कम होगी।
धान, मक्का, अरहर समेत कई फसलों पर विशेष नजर रखने की सलाह
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि इस समय जनपद में धान, अरहर, मक्का, ज्वार, बाजरा, उर्द, मूंग और विभिन्न सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। ऐसे में मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण इन फसलों में कीट और रोगों का खतरा बढ़ सकता है। कृषि निदेशालय, लखनऊ की ओर से जारी वैज्ञानिक सलाह के आधार पर किसानों को फसलवार प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई है।
धान की फसल में खरपतवार और कीटों से बचाव पर विशेष जोर
कृषि विभाग ने धान की खेती करने वाले किसानों को खरपतवार नियंत्रण के लिए समय पर अनुशंसित खरपतवारनाशी का प्रयोग करने की सलाह दी है। साथ ही तना बेधक, पत्ती लपेटक और फुदका जैसे प्रमुख कीटों की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाने तथा आवश्यकता पड़ने पर अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करने को कहा गया है।
इसके अलावा जीवाणु झुलसा और अन्य जीवाणुजनित रोगों से बचाव के लिए जैविक उत्पादों और वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित दवाओं के उपयोग की भी सलाह दी गई है।
मक्का में फॉल आर्मी वर्म और तना बेधक से सतर्क रहने की सलाह
मक्का उत्पादक किसानों को फॉल आर्मी वर्म और तना बेधक कीट से सावधान रहने को कहा गया है। विभाग ने खेतों में पक्षी आश्रय, प्रकाश प्रपंच और फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी है। यदि आर्थिक क्षति स्तर तक प्रकोप दिखाई दे तो कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करने को कहा गया है।
दलहनी फसलों में बीजशोधन और जैविक उपचार पर जोर
अरहर, उर्द और मूंग जैसी दलहनी फसलों को मृदा जनित रोगों से बचाने के लिए ट्राइकोडर्मा और ब्यूवेरिया बेसिअना जैसे जैविक उत्पादों के उपयोग की सलाह दी गई है। विभाग ने किसानों से बुवाई से पहले बीजशोधन करने का भी आग्रह किया है, जिससे बीजजनित रोगों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।
सब्जी उत्पादक किसानों के लिए भी जारी हुई विशेष गाइडलाइन
बैंगन की फसल में फल एवं तना बेधक तथा मिर्च में थ्रिप्स और फल बेधक कीट के बढ़ते खतरे को देखते हुए कृषि विभाग ने समय पर निगरानी और अनुशंसित दवाओं के छिड़काव की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि शुरुआती अवस्था में नियंत्रण करने से नुकसान काफी हद तक रोका जा सकता है।
AI तकनीक वाला ऐप करेगा किसानों की मदद
जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने बताया कि भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने AI आधारित राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (National Pest Surveillance System) विकसित की है। इस मोबाइल ऐप के माध्यम से किसान अपनी फसल में लगने वाले कीट और रोग की पहचान स्वयं कर सकते हैं। ऐप पर जानकारी अपलोड करने के बाद किसानों को वैज्ञानिक प्रबंधन और उपचार संबंधी सुझाव भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
किसानों से नियमित निगरानी की अपील
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खेतों का नियमित निरीक्षण करते रहें और कीट या रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विभाग या कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क करें। समय पर वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने से न केवल फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती की लागत भी कम की जा सकती है।