
Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले राजधानी दिल्ली में आयोजित सर्वदलीय बैठक सियासी टकराव का अखाड़ा बन गई। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को बैठक में आमंत्रित किए जाने पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आम आदमी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), वाम दलों और अन्य विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताते हुए बैठक से वॉकआउट कर दिया। हालांकि कुछ देर बाद विपक्षी नेताओं ने इसे ‘सांकेतिक विरोध’ बताते हुए दोबारा बैठक में हिस्सा लिया।
TMC के 20 बागी सांसद बने विवाद की वजह
विवाद की जड़ TMC के वे 20 सांसद हैं, जिन्होंने अलग होकर NCPI नामक राजनीतिक दल का गठन किया है। विपक्ष का आरोप है कि इन सांसदों को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की ओर से औपचारिक मान्यता नहीं मिली है और उनके खिलाफ दायर अयोग्यता (डिस्क्वालिफिकेशन) की याचिकाएं भी लंबित हैं। इसके बावजूद उन्हें अलग दल के रूप में सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित करना संसदीय परंपराओं और संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है।
महुआ मोइत्रा ने उठाए सरकार पर गंभीर सवाल
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि बैठक में जारी सूची में TMC के कुल सांसदों की संख्या 28 दिखाई गई, जबकि 20 बागी सांसदों के विलय या अलग पहचान पर अभी तक स्पीकर का अंतिम फैसला नहीं आया है।
उन्होंने कहा कि 91वें संविधान संशोधन के बाद अलग गुट (Separate Group) का प्रावधान समाप्त हो चुका है। ऐसे में संसदीय कार्य मंत्रालय ने इन सांसदों को किस आधार पर बैठक में बुलाया, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
कांग्रेस, सपा और AAP ने सरकार को घेरा
बैठक से बाहर निकलने के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी का आरोप लगाया।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि बिना अंतिम संवैधानिक निर्णय के बागी सांसदों को मान्यता देना संविधान की भावना के विपरीत है।
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने सवाल उठाया कि कानून की किस व्यवस्था के तहत इन सांसदों को अलग पहचान दी गई है।
वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद एन.डी. गुप्ता ने कहा कि उनकी पार्टी के राज्यसभा सांसदों के मामले में भी याचिका लंबित होने के बावजूद अलग सीटें आवंटित कर दी गईं, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
बागी सांसदों ने कहा- विकास के लिए लिया फैसला
दूसरी ओर, NCPI में शामिल TMC की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सरकार के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल अपने निर्वाचन क्षेत्रों और राज्य के विकास के लिए काम करना है।
उन्होंने बताया कि सभी आवश्यक दस्तावेज संबंधित अधिकारियों को सौंपे जा चुके हैं और पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार आगे बढ़ रही है।
सांकेतिक विरोध के बाद फिर बैठक में लौटा विपक्ष
शुरुआती विरोध और वॉकआउट के बाद विपक्षी दलों के नेता दोबारा बैठक में लौट आए। नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध सरकार के फैसले के खिलाफ था, लेकिन संसद के सुचारू संचालन और जनता के मुद्दों को उठाने के लिए बैठक में शामिल रहना जरूरी है।
मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले हुए इस घटनाक्रम ने साफ संकेत दे दिए हैं कि आगामी संसद सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिल सकती है।