
Chandauli News: सकलडीहा क्षेत्र के टिकरवापर गांव में मंगलवार-बुधवार की रात एक ऐसी दर्दनाक घटना हुई जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। बीमार पत्नी की दवा लेकर घर लौट रहे 65 वर्षीय वृद्ध की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। पति की मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची, पहले से बीमार पत्नी यह सदमा सहन नहीं कर सकीं और करीब चार घंटे बाद उन्होंने भी अंतिम सांस ले ली। एक ही दिन पति-पत्नी की दो अर्थियां उठने से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
पत्नी की दवा लेकर लौट रहे थे, रेलवे ट्रैक पार करते समय हुआ हादसा
टिकरवापर गांव निवासी मिठाई राम (65) मंगलवार शाम अपनी पत्नी इमरती देवी (60) की दवा लेने चतुर्भुजपुर बाजार गए थे। दवा लेकर घर लौटते समय सकलडीहा रेलवे स्टेशन के पास पंडित दीनदयाल उपाध्याय–पटना रेलखंड की डाउन लाइन पार करते समय वह तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आ गए।
हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। इलाज के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई।
पति की मौत का सदमा नहीं सह सकीं पत्नी
मिठाई राम की मौत की सूचना जैसे ही घर पहुंची, पहले से साइटिका की बीमारी से जूझ रहीं उनकी पत्नी इमरती देवी गहरे सदमे में चली गईं। परिजनों के मुताबिक वह पूरी रात बेसुध रहीं और बुधवार तड़के करीब दो बजे उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। कुछ ही देर बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया। चिकित्सकों का प्राथमिक अनुमान है कि उन्हें हार्ट अटैक आया था।
ग्रामीणों का कहना है कि दोनों के बीच बेहद गहरा लगाव था। पति की मौत का दुख इमरती देवी सहन नहीं कर सकीं और कुछ ही घंटों में उन्होंने भी दुनिया छोड़ दी।
एक ही दिन उजड़ गया परिवार, पांच बेटों पर टूटा दुखों का पहाड़
एक ही दिन माता-पिता को खोने के बाद दंपति के पांचों बेटों का रो-रोकर बुरा हाल है। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। पूरे गांव में दिनभर मातम का माहौल बना रहा।
पुलिस ने मिठाई राम के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, जबकि इमरती देवी के निधन के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गईं।
आर्थिक रूप से कमजोर था परिवार, झोपड़ी में गुजर-बसर
ग्रामीणों के अनुसार परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। मजदूरी कर किसी तरह घर का खर्च चलता था और पूरा परिवार झोपड़ी में रहता था। अब माता-पिता दोनों के निधन के बाद पांच बेटों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
गांव के लोगों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने और सरकारी योजनाओं का लाभ तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है।
प्रशासन ने जांच के बाद सहायता का दिया भरोसा
तहसीलदार अनुराग सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि परिवार शासन द्वारा निर्धारित पात्रता की श्रेणी में पाया जाता है तो कृषक दुर्घटना सहायता योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाएगी।